Sunday, 23 January 2022

भारत अपना देश, प्यारा प्यारा भारत देश 【ई-पत्रिका)】23/01/2022

         आजादी के 75वें अमृत महोत्सव से स्वर्णिम भारत की ओर अग्रसर इस महा यज्ञ मैं  डॉ० प्रतिभा गुप्ता 'माही' व हमारी संस्था 'एम० के० साहित्य अकादमी (रजि०)पंचकूला' साहित्यिक, सांस्कृतिक, सामाजिक व आध्यात्मिक मूल्यों को समर्पित हो, अपना विशेष योगदान देते हुए, समस्त भारत वासियों , भाइयों व बहनों को ढेर सारी  शुभकामनाएं एवं बधाईयां देती है।
सदस्यों की सूची
1. पुष्पिंदरा चगती भंडारी 
2. डॉ० प्रतिभा 'माही' 
3. गणेश दत्त 
4. सुदेश मोदगिल 'नूर' 
5. सुनीता गर्ग  
6. दीपक शुक्ला 
7. डॉ० प्रज्ञा शारदा 
8. नीरू मित्तल जी
9. ऊषा गर्ग जी
10. रेणु अब्बी जी
11. सरोज चौपड़ा जी
12. संगीता शर्मा कुंद्रा जी
13. नलिनी उप्पल
14. विजय सचदेवा 
15. आभा मुकेश साहनी
16. रेखा मित्तल
17. मोहिनी सचदेवा
18. चन्द्रकला जैन
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1)- बेफिक्र
गर्व है मुझे..
सीमा पर लड़ने वाले
अपने वीर सिपाहियों पे,
मैं बेफिक्र हो कर सोती हूँ ।।

गर्व है मुझे ..
खेतों में पसीना बहाने वाले
अपने वीर कृषकों पे 
मैं पेट भर खाती हूँ ।।                 

©पुष्पिंदरा चगती भंडारी
(पश्चिमी दिल्ली ज़ोन की अध्य्क्ष)
महिला काव्य मंच, दिल्ली
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2)-शत शत नमन शहीदों को
करता भारत शीश झुकाकर , शत शत नमन शहीदों को।
अश्क़ स्वरूपी सुमन चढ़ाकर, शत शत नमन शहीदों को।।

पुलवामा की इस घटना ने, दिल को चकना चूर किया।
भारत के हर शख़्स को इसने, उठने को मजबूर किया।।
बच्चे बूढ़े नर नारी सब , उतर पड़े हैं सड़कों पर।
मोदी जी अब कदम उठाओ , लफ़्ज़ यही हैं होठों पर।।
माता के हृदय से चिपके, देखो लाल सिसकते है।
बहना के पथराये नैना, वीर का रस्ता तकते हैं।।
वीर शहीदों की रूह पूछे , कुछ तो बोलो मोदी जी।
उबल रहा है लहू हमारा , मुख तो खोलो मोदी जी।।
आतंकी का खौफ बताओं, कब तक राज करेगा अब।
घाव लगे हैं जो ह्रदय पर, उनको कौन भरेगा अब।।
बतलाओ क्या उत्तर दे हम, अपने वीर शहीदों को।
करता भारत शीश झुकाकर, शत शत नमन शहीदों को।।

शस्त्र सजाकर बैठे हैं बस, एक इशारा दे दो तुम।
आज मिला देंगे माटी में, बैठ नज़ारा देखो तुम।।
अब सहन नहीं होती हमसे, ये पाकिस्तान की गद्दारी।
पाल रहा जो आतंकी को, करता छुपकर गोलाबारी।।
आदेश तुम्हारा मिल जाये, तो डंका आज बजा देंगे।
कमजोर न समझें भारत को, ये दुनिया को समझा देंगे।।
शीश हिलाकर पी०एम० ने फिर, सेना को आदेश दिया।
ब्रह्ममहूर्त में पवनदूत को, बालकोट में भेज दिया।।
बोले जाओ आग लगा दो, दुश्मन के तुम डेरों पर।
लौटोगे है पूर्ण भरोसा, मुझको अपने शेरों पर।।
हाथ जोड़कर बोले 'माही', शत शत नमन शहीदों को।
करता भारत शीश झुकाकर, शत शत नमन शहीदों को।।
©डॉ०प्रतिभा 'माही' पंचकूला
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3)- भारत  सबसे न्यारा है
मेरा भारत सबसे सुंदर, मेरा भारत बने महान ।
जाती धर्म पीछे रह जाएँ, देश प्रेम का हो गुणगान ।।

वीरों की एक ही भाषा है , वीरों का एक ही नारा  है ।
मर जाएंगे देश के ख़ातिर , दिल देश पे वारा है ।।

अपने देश की रक्षा करना, लक्ष्य आज हमारा है ।
दुनियाँ भर के देशों में भारत  सबसे न्यारा है।।

स्वतंत्र हुए कई वर्ष हुए,भारत अब बन रहा महान।
देश प्रेम से, भरलें खुद को, रखें इसकी पूरी शान।।

वर्षगाँठ मनाते आए हैं, हर्षित होते हर साल।
अपनी ग़लतियों से हम सीखें,ना खड़ा हो कोई बवाल।।

सरल नहीं है देश पे मिटना,फिर भी वो दिल रखता है ।
चैन की नींद हम सो पाएँ, दिन रान वो मरता है।।

रोज़ रोज़ हो रहे शहीद, वीर गति वो पातें हैं।
सगे सम्बन्धी उनको खोकर हृदय विषाद को पातें हैं ।।

हम सब का है फ़र्ज़ यही हर उस घर का रखें ध्यान ।
जिस घर से वीर सैनिक भारत माँ पर हो क़ुर्बान ।।
©गणेश दत्त ( पंचकूला, हरियाणा)
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4)- शहीदों को सलाम
भारत माँ का हर इक ज़र्रा, हमको जान से प्यारा है।
तन मन धन क़ुर्बां इसपे, यह हिन्दुस्तान हमारा है।।

आज़ादी पाने की लिए,वीरों  ने खुद को वारा है।
आज़ादी की रक्षा करना, पहला फ़र्ज़ हमारा है।।

भारत माँ की ज़ंजीरों को जिन वीरों ने खोला ।
आज़ादी को उन वीरों ने अपनी जान से तोला ।।

क़त्ल करके अपने दिल को,लिख गये खूं से कहानी।
यह आज़ादी है उन्हीं वीरों की हम पर मेहरबानी।।

माँ की आज़ादी की ख़ातिर जान अपनी सबने दी।
और जान के बदले में आज़ादी वापिस ले ली।।

आओ शीश झुकाये उनको,करें उनका गुणगान।
अपना तिरंगा झंडा तो है उन वीरों का निशान।।

पाई विरासत में आज़ादी, क़ीमत इसकी बतायें।
आने वाली पीढ़ी को अब सारा हाल सुनायें।।

भगतसिंह ने फाँसी चढ़ के दिये थे अपने प्राण।
लाला जी भी लाठियाँ खाकर हुये थे लहुलूहान।।

चंद्रशेखर आज़ाद ने खुद पर खुद ही गोली चलाई।
उनको फ़िरंगी छू ना ले,यह क़सम उन्होंने थी खाई।।

ऐसे ऐसे वीरों की हम दोहराये आज कहानी।
शेर सपूत थे भारत माँ के, वो सब थे बड़े स्वाभिमानी।।

सुनो वतन के नौजवानों माँ ने तुम्हें पुकारा है।
भारत माँ की रक्षा करना पहला फ़र्ज़ तुम्हारा है।।

तुमने विरासत में पाई, आज़ादी इसे सम्भालों।
मज़हब के झगड़ों को छोड़ो, सबको गले लगा लो।।

क़सम तुम्हें आज़ादी की, ना भूलना तुम यह कहानी।
याद सदा रखना हमको, कह गये सभी बलिदानी।।
©सुदेश मोदगिल ‘नूर’
पंचकूला ( हरियाना)
9779794008
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5)- भारत के वीर जवानों 
भारत के वीर जवानों पर, हम सब को नाज़ है।
जान लुटाने को तैयार हरदम, ऐसे वो जाँबाज़ हैं।।

प्रहरी बन डटे सीमाओं पर, रात-दिन का न होश है।
दुश्मन पर काल बन कर टूटें, रगों में ऐसा जोश है।।

देश की आन-बान हेतु, जान अपनी लुटा जाते हैं।
देश नतमस्तक होता जब तिरंगे में लिपट आते हैं।।

माँ रोती है देख लाल को, बीवी भी बेहाल होती है।
बहन की राखी की लाज, जब देश के नाम होती है।।

पिता की आँख भी, कभी-कभी छुप कर रोती है।
देख बेटे की शहादत, उसकी छाती चौड़ी होती है।।

होता जब जंग का ऐलान, दुश्मन फिर ख़ौफ़ खाता है।
होता हर भारतीय का सर ऊँचा तिरंगा जब लहराता है।।
©सुनीता गर्ग 
पंचकुला  ( हरियाणा) मो० 8360443109
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6)- राष्ट्र गौरव
मैं यहाँ हाज़िर नहीं हूँ सिर्फ हंगामा लिए।
राष्ट्र हित थामी कलम वो कलम चलनी चाहिए।।

बुझ चुकी जो बेहतरी की आग बीते सालों में।
हो कहीं शुरुआत लेकिन आग जलनी चाहिए।।

जो करें भारत सनातन के गौरव की प्रतिष्ठा।
राष्ट्र हित उनकी फिजा चहुँ ओर बननी चाहिए।।

कवि और कविता नहीं हैं, मात्र मन रंजन यहाँ।
सत्य की भी लेखनी दमदार चलनी चाहिए।।

राष्ट्र हित जीवन समर्पित आज जिसका देश में।
आगे बढ़ कर सबको उसका साथ देना चाहिए।।

राष्ट्र गौरव के लिए जो भिड़ गया हो विश्व से।
साथ उसका एक बार फिर निभाना चाहिए।।
कवि दीपक शुक्ल
(संगरूर ,पंजाब)
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7)-अनेकता में एकता , हिन्द की विशेषता
एकता चिल्लाई इक़ दिन, सुनो-सुनो मेरी बात,
नहीं रहोगे मिलजुल कर, तो शत्रु देंगे मात।

मैं तो राष्ट्र हितैषी हूँ, सुनो सभी मेरी बात,
यदि करोगे भक्ति मेरी, सदा मैं दूँगी साथ।

राष्ट्र के हर मानव से कह दो, करे मेरा सम्मान,
मैं जिताऊँगी तुम्हें, इस बात का रखना ध्यान।

राष्ट्र के हित के लिए, मुझे कवच बनाओ,
साधना से मेरी तुम, मुझको साध जाओ।

एकता में ही संबल है, 
जिस देश में नहीं, वो निर्बल है।
ये कैसी आज़ादी है, हर ओर बर्बादी है,
जात और पात भी फैली है, छुआ-छूत भी बाकी है।।

एकता है राष्ट्र का आधार, 
न थोपो उस पर साम्प्रदायिक विचार।
एकता है अंत दुखों का,
इसमें ही कल्याण अपनों का।
अनेकता में एकता है, मेरे भारत की विशेषता।।

यही पाठ हमने पढ़ा, और सबको पढ़ाया है,
किंतु प्रत्यक्ष में इसका, कहीं न दर्शन पाया है।

इतिहास भी गवाह है, शक्ति मेरी अपार है,
एकता ही करेगी, राष्ट्र का बेड़ा पार है।
©डॉ. प्रज्ञा शारदा
( चंडीगढ़ ) मो०9815001467
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8)- मातृभूमि
जहाँ जन है जहाँ गण है वहीं भारत का मन है।
मातृभूमि के पावन चरणों में मेरा कोटि नमन है।।

हरित धरा है नील-गगन है पँछी गुंजन कलरव है।
भरे वृक्षों से झरते झरनों से दृश्य ये अभिनव है।
करते क्रीड़ा मृग विहग संग सिंह सम्भव है।
है समर्पित पावन भूमि को मेरा हर पल छन है।।
मातृभूमि के पावन चरणों में मेरा कोटि नमन है।।

गौतम बुद्ध और महावीर की पावन ये धरा है।
राम मर्यादा कृष्ण की लीला से जीवन भरा है।
तुलसी मीरा रहीम कबीर वाणी का अमृत झरा है।
दयानन्द विवेकानंद की वाणी का नन्दन है।।
मातृभूमि के पावन चरणों में मेरा कोटि नमन है।।

ज्ञान वेद का उपनिषदों का जीवन में उतरा है।
गीता के उपदेशों से हर कर्म सार खरा है।
आयुर्वेद योग ध्यान में दर्शन अध्यात्म भरा है।
निर्मल प्रेम धारा में लिपटा जन मानस पावन है ।।
मातृभूमि के पावन चरणों में मेरा कोटि नमन है।।
©नीरू मित्तल 'नीर'
(पंचकूला, हरियाणा)
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9)-आख़िर  कुर्बानियां रंग लाईं
एक बड़ी प्रसिद्ध कहावत है, 
आग लेने आई, बन बैठी घरवाली। 
ईस्ट इंडिया कंपनी ने भी, 
ऐसी ही चाल थी चाली।। 

करने लगे व्यापार देश को, 
खोखला था उन्होंने बनाया। 
कच्चा माल जहाज़ भर-भर कर, 
मुफ़्त में  अपने देश पहुंचाया।। 

फूट डालो और राज करो, 
कूटनीति यह उन्होंने अपनाई। 
एक एक कर के सभी रियासतें, 
अपने राज्य में थीं मिलाईं।। 

खुराफाती दिमाग़ कलाईव का, 
    हर हथकंडा अपनाया। 
राजाओं को आपस में लड़ाकर, 
कानून अपने अनुसार बनाया।। 

रानी लक्ष्मी बाई, नाना साहिब, 
मंगल पांडे जैसे अनेकों वीर। 
सत्तावन में शहीद हो गए, 
खींच गए आगे पक्की लकीर।। 

आज़ादी की चिंगारी जो भड़की, 
आगे चलकर बनी मशाल। 
भगत, राजगुरू, सुखदेव ने, 
उसमें और भी तेल दिया डाल।। 

असैंबली में बम फेंका वीरों ने, 
शायद खुलें अंग्रेजों के कान बहरे। 
न पुलिस के पकड़े जाने का डर, 
उसी जगह पर खड़े रहे।। 

लाला जी की मृत्यु का लिया बदला, 
सांडर्स को जब मार गिराया। 
लंडन जाकर ऊधम सिंह ने, 
उड्वायर को गोली से उड़ाया।। 

चला मुक्कदमा, भगत, राजगुरू, सुखदेव, 
तीनों को फांसी  गई सुनाई। 
वतन पर मर मिटने को तैयार, 
चंद्रशेखर, सराभा ने बलि चढ़ाई।। 

सर-फरोशी की चाहत में उतावले, 
लाखों देश भक्तों को दिया पैगाम। 
गुलामी की बेड़ियाँ काटनी भारत माता की, 
बस आज़ाद  हो मेरा देश, 
जो अभी तक है गुलाम।। 

वक्त से पहले दे दी फांसी, 
अंग्रेज़ी सरकार अंदर से डर गई थी। 
कहीं जन्म न लें ले हज़ारों भगत सिंह, 
यही सोच उनकी आत्मा मर गई थी।। 

आख़िर  कुर्बानियां रंग लाईं, 
देश मेरे को मिली आज़ादी। 
रखना इसे अब तुम्हीं संभाल कर,  
बच्चे- बच्चे के मन में जोत जला दी।। 
 ©उषा गर्ग 
(सैक्टर 15 पंचकूला ,हरियाणा)
मोबाइल नं 9417869922
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10)- श्रद्धांजलि शहीदों को
अमर शहीदों का देश मेरा,
भक्त सिंह, राजगुरु सहदेव का डेरा।

कैसे हंस-हंस कर तुम ने दी कुर्बानी,
तुमने देश आजाद करवाने की ठानी ।

चूम लिए फांसी के फंदे,
इश्क था तुम्हारा रूहानी।

कतरा कतरा लहू का बहाया,
भारत के देश को आजाद कराया।

नवयुग के सृजन सपनों से,
नई उमंगों से देश सजाया।

आज भी मातृभूमि की रक्षा में
कितने सैनिक शहीद हो गए।

आज भी अपने देश की खातिर,
कितने लाल कुर्बान हो गए।

बौछार गोलियों की सरहद पर,
वीर सेनानी पराक्रमी, है सहते।

शत-शत नमन उन वीरों को,
जिन्होंने दी देश पर दी कुर्बानी।

अमर जवान ज्योति विलीन तेरा,
अमर चक्र लौ से जगा देश मेरा।

नतमस्तक, भावविभोर मन मेरा,
सजल नयन, श्रद्धांजलि दे दिल मेरा।
©रेणु अब्बी "रेणू"
चंडीगढ़
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11)- धन्य धन्य ये भारत भूमि          
धन्य धन्य ये भारत भूमि, जहां महावीर उपजाए जाते है।
देश की खातिर प्राण गँवाने, को जो तत्पर हो जाते है।।

बचपन से ही भारत मां को हम तो शीश झुकाते हैं।
मात-पिता घरवार छोड़ कर ,सेना में नाम लिखाते हैं।।

अपनी मां को भूल भालकर , देश पर बलि-बलि जाते हैं।
छाती पर गोली खाने में , कभी भी नहीं संकुचाते है।।

सुभाष,लाजपत,पद्माबाई ने, दुश्मन की रेल बनाई थी
महाराणा प्रताप,लक्ष्मीबाई ने ख़ूनी नदी बहाई थी

मरते-मरते  भारत माँ जी  जय का नारा गाते हैं।
रक्त रंजित हो-होकर वो लिपट तिरंगा आते हैं।।

बड़े धन्य हैं माता पिता वो, जो हँसते-हँसते सब सह जाते।
एक हुआ न्योछावर तो फिर, दूजे को सेना में भिजवाते।

धन्य धन्य ये भारत भूमि, जहां महावीर उपजाए जाते है।
देश की खातिर प्राण गँवाने, को जो तत्पर हो जाते है।।
© सरोज चोपड़ा
पंचकूला(हरियाणा)
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12)-जा बेटा तू सीमा पर
जा बेटा तू सीमा पर, मैं बैठ प्रार्थना करता हूँ।
तेरे लंबे जीवन की खातिर, मैं आराधना करता हूँ।।

दुश्मनों के खून से, भारत वंदना करना तुम।
बढ़ते जाना आगे आगे, झंडा ऊँचा रखना तुम।।

दुश्मन को पीठ दिखाना मत, आगे बढ़ते जाना तुम।.    अपना फर्ज भुलाना मत, झंडे कस मान बचाना तुम।।

जो प्राण गए तो गम ना करना, मैं खुद को संभाल लूँगा।
तेरी याद मे सीना चौड़ा करके, उमर अपनी निकाल लूँगा।

तुझ को किया समर्पित देश को,अब आँसू नहीं बहाऊँगा।
तू भी शपथ ले भारत माँ की, मर कर भी फर्ज निभाऊँगा।
©संगीता शर्मा कुंद्रा, चंडीगढ़

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13)- यह हम सबका हिंदुस्तान है 
आया दिन फिर आज़ादी का 
क़ुर्बान हुए जिसे पाने को
कितने वीर ना जाने सब
झंडा ऊँचा भारत माँ का लहराया था तब

सब कुछ भूल
देश की आन बचाने आए थे जो 
दम लिया आज़ादी दिलवा  कर
सच्चे देशभक्त थे वो 

सीना ठोक खड़े थे
दुश्मन को ललकारा था, फंदा चूम स्वीकार था 
दिया अपना बलिदान था
बढाया भारत माँ का मान था

माता-पिता,बहिन-भाई,
पत्नी -बच्चे
सबसे ऊपर चाहा देश को
देशभक्त थे वो सच्चे

आयी जब जान देने की बारी 
लगा कर अपना सब दाँव पर
एक - एक ने निभाया फ़र्ज़
रखा पाँव इंकलाब की आग पर

हंसते -हंसते शहीद हो गए
सम्भाल रखना अपने देश को ,कह गए
आज देश का जो हाल है 
हम में से हर एक शख़्स इसका ज़िम्मेवार है 

क्या चुका पायेंगे शहीदों के बलिदानों का 
हम थोड़ा सा भी कर्ज़,
या ,दिलाना होगा हर एक को याद 
आज अपना फ़र्ज़

देशभक्ति ना जाने 
कहाँ खो गयी
क्या देश की जवाबदेही 
सिर्फ़ कुछ लोगों की हो गयी?

देते आज भी जान सरहद पर डटे सिपाही  हैं
इस धरती के लाल तो तुम भी हो
क्या तुमने कोई ज़िम्मेवारी निभायी है?
आज़ादी तो तुमने भी पायी है 

सवाल करोगे जब तुम यह 
अपने ज़मीर से,
आइने से आँख ना मिला पाओगे
देखो ,बेशक क़रीब से 

पाओगे अक्स हर  शहीद का ,
अपने में तुम खुद
क्या तभी तुम्हें आएगा याद 
लेना अपने देश की सुध?

कब जागोगे ?
कब समझोगे
इसके लिए तो बनती
हर किसी की जवाबदेही है 

मत भूलो 
भारत माता 
खून वीरों का 
देख बहुत रोयी है 

कण -कण  में बस्ती इसमें
शहीदों की गाथा है
यह धरती मेरे देश की है 
यह मेरी भारत माता है

हर नागरिक रखे
जज़्बा एक सिपाही  का जब
सच्ची श्रद्धांजलि होगी हमारे 
शहीदों को बस  तब 

सिर्फ़ मेरा नहीं, 
तेरा भी है 
यह हमारा देश महान है
यह हम सबका हिंदुस्तान है 
© नलिनीउप्पल
डेराबस्सी ,पंजाब  
e mail-  nalini.poeticvein@gmail.com
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14)-26 जनवरी
यूं ही नहीं हम 26 जनवरी को इतनी शान से मनाते हैं,
हम विश्व को अपनी ताकत और एकता का प्रमाण दिखाते हैं।।

 यूं ही नहीं हम जगह-जगह तिरंगा लहराते हैं,
और एकजुट होकर देश भक्ति के गीत गाते हैं।।

 हमारे पूर्वजों की कुर्बानियों को भी गिनवाते हैं,
और शहीदों की वीर गाथाएं भी सुनाते हैं।।

भले ही मतभेद हो हमारे अंदर बहुत सारे,
पर जब देश की बात हो तो हम एक हो जाते हैं।।

असली मकसद तो हममें देश प्रेम और देशभक्ति की भावना जगाना है,
और भावी पीढ़ी को आजादी की कीमत बतलाना है।।

 भारत का इतिहास तड़पते हाथों से खून से लिखा गया है,
 हमारे पूर्वजों ने असंख्य अत्याचार सह कर स्वतंत्रता का फल पाया है ।।

कोई गद्दारी ना करें तो भारत को विश्व में कोई हरा नहीं सकता,
किसी भी क्षेत्र में भारत की बराबरी कोई देश पा नहीं सकता।।

मुझे गर्व है अपने देश की अखंडता एवं एकता पर,
 खून की होलियां खेल सकते हैं जरूरत पड़ने पर ।।

अभी तो हम शांत समंदर है वक्त आने पर तूफान बन कर दिखा देंगे,
कोई हमारे देश की ओर नजर उठाकर देखेगा तो उसका नामोनिशान मिटा देंगे।।
©विजय सचदेवा
(पंचकूला, हरियाणा) मो०9871097849
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15)-सैनिक की अभिलाषा
तिरंगे में ग़र लिपटा आऊँ, तुम कभी आँसू बहाना न।
मेरी शहादत पर तुम कहीं, अपने गम को दिखाना न।।

मुझे भारत की मिट्टी का, माँ, तूँ तिलक लगा देना।
ये वीरों की ही धरती है, दुनियाँ को बतला देना।।

मेरा ईमान ही है तिरंगा, मेरी ही शान है तिरंगा।
सरहद का मैं रखवाला, सैनिक हूँ मैं मतवाला।।

सिंह सा ललकारूँ शत्रु को ,देश का वीर सपूत हूँ मैं ।
व्यर्थ जीवन न जाये मेरा ,इक ऐसी अलख जगा देना ।।

वन्दे मातरम् का माँ, तब उद्घोष करूँगा मैं ।
शत्रु के छक्के छुड़ाऊँगा , ऐसा प्रहार करूँगा मैं।।

दफ़्न कर दूँगा हर कोशिश,लहू दुश्मन का बहाऊँगा।
चीर दूँगा उस सीने को, जो माँ पर आँख उठाएगा।।

माँ का क़र्ज़ चुका पाऊँ , देश का परचम लहराऊँ ।
दो आशीष मुझे माता , उठे तेरा सर गर्व से सदा ।।

वतन ही मेरी आरज़ू, वतन ही मेरी आबरू।
वतन पे जाँ फ़िदा करना , यही है मेरी अभिलाषा ।।
©आभा मुकेश साहनी 
पंचकूला
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16)-थाली के लाल
कोटि-कोटि नमन है ,देश के पहरेदारो को ,
युगों युगों तक करेगा स्मरण ,वतन के रखवालो को।

सर्द बर्फीली वादियों में ,सीना तान खड़े तुम ,
प्रहरी हो देश के ,भरोसा तान खड़े तुम।

आंखों में आंसू ,अंबर में कहीं खो गए,
विश्वासघात करा दुश्मन ने, चिर निद्रा में सो गए। 

दे कुर्बानी  देश के लिए ,कुछ वीर अमर हो गए,
इतिहास बना पन्नों में  , कुछ पंछी मुक्त हो गए।

देश सेवा ही धर्म तुम्हारा, सदा करते यही ललकार ,
भारत माता की जय होगी ,यही तुम्हारी पुकार ।

रोई धरती, रोई दिशाएं,आसमान भी रोया होगा,
नम आंखों से वीरों की ,शहादत को धोया होगा।

अनगिनत मांओ के सीने में‌ ,शोला दहला होगा,
 बच्चों ने अपने सिर से , साया खोया होगा ।

सुहागिनों का मिटा सिंदूर ,बहनों का बिछड़ा प्यार ,
अपने साथियों को भी, सदा के लिए खोया होगा।

जलती चिताओं में शहीद, सदा के लिए सो गए,
 धरती के कुछ लाल ,सदा के लिए अमर हो गए।
 © रेखा मित्तल, स्वरचित
      चंडीगढ़
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17)- हमारे वीर जवान 
देश की सेवा में जो दिन रात है लगे हुए,
अपनी जान की परवाह ना कर, 
सीमाओं पर है डटे हुए।

जमा देने वाली ठंड हो या जला देने वाली गर्मी हो,
दिन रात दुश्मन की गोलियों के बीच रहते हैं, 
जो बिना डरे हए।

जो मौत के मुंह में रहकर भी देश पर आंच ना आने देते हैं,
विपरीत परिस्थितियों में भी असंभव को संभव बना देते हैं।

देश के अंदर भी जब-जब विपदा है आई,
अपनी जान पर खेलकर, 
इन वीरों ने हमारी जान है बचाई।

इतिहास नहीं भूलेगा उनको जो मर कर भी नहीं मरते हैं,
ऐसे वीर जवानों को हम दिल से नमन करते हैं।
©मोहनी सचदेवा ,
पंचकूला हरियाणा
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18)-गणतंत्र की पावन बेला
गणतंत्र की जड़े गहरी है,
संविधान की नींव पुख्ता,
धर्म, स्त्री-पुरुष, जात-पात से, परिभाषित नहीं अधिकार हमारे,
कथनी-करनी का अंतर मिटे तो,
जागे, धन्य-धन्य भाग्य हमारे!

जल-जंगल-जमीन से बेदखल,
आदिवासी भाई हमारे, आत्महत्या पर,
 मजबूर किसानो की पीढ़ी,
भ्रूणों में दम तोड़ती कन्याएं,
जनम लें भी तो 
झपटनें को तैयार,
भेड़ियों सी लोलुप निगाहें

सीढ़ियां चांद-मंगल तक जा पहुंची,
आदमी-आदमी  के बीच दूरी बढ़ी,
तर्क नई दिशाएं छू रहा,
प्रश्न उठ-उठ, तलाशते है उत्तर.

जीवन मूल्य विकसित करने में,
नाकाम हमारी शिक्षा,
नेताओं-आंदोलनों से टूटा भ्रम,
मोहरा बनाती राजनीति से,
जन-जन का हुआ मोहभंग!

आंखों में सपने,
कदमों में संकल्पों का साहस,
बाजुओं में चुनौतियों से लड़ने का जोर,
स्वयं को तौलने की सचाई,
सही अक्स देखने की ललक,
झूठ का आवरण हटा,
सच कहनेका दम है.

परिश्रम, सचाई, ओज, ऊर्जा के,
ताने-बाने से,
भविष्य बुननेका वक्त आ गया है,
आदर्शों की दुहाई, नैतिकता के नारे,
देश नहीं संवारते,
कीचड़ में कमल बन
खिलने की बेला है,
कल और आज के बीच,
सार्थक पुल बनाने, 
गणतंत्र को मजबूत करने,
युवा कदम आगे बढ़ आये है,
अब नई पीढ़ी को लड़ना है
न्याय की लड़ाई! 
©चंद्रकला जैन, वैनकूवर (कनाडा)
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एम० के० साहित्य अकादमी (रजि०) पंचकूला' दिनांक 23/01/2022 को प्रातः 11 बजे ऑनलाइल वेबिनार का आयोजन किया गया।  इस अवसर पर देशभक्ति से ओतप्रोत रचनाओं के साथ सभी सदस्य आमंत्रित हुए व काव्यपाठ किया। 
               इस कार्यक्रम में हमारी मुख्य अतिथि : श्रीमती पुष्पिंदरा चगती भंडारी जी (पश्चिमी दिल्ली ज़ोन की अध्यक्ष, महिला काव्य मंच, दिल्ली) रहीं तथा अध्यक्षता श्रीमती सुदेश 'नूर' मुदगिल जी, हमारी वरिश्ठ साहित्यकारा ने की। 
            इस महा यज्ञ में हम डॉ० प्रतिभा गुप्ता 'माही' व हमारी संस्था 'एम० के० साहित्य अकादमी (रजि०) पंचकूला' साहित्यिक, सांस्कृतिक, सामाजिक व आध्यात्मिक मूल्यों को समर्पित हो, अपना विशेष योगदान देते हुए समस्त भारत वासियों , भाइयों व बहनों को ढेर सारी  शुभकामनाएं एवं बधाईयां दीं।

डॉ० प्रतिभा गुप्ता 'माही'
संस्थापिका/अध्यक्षा
एम० के० साहित्य अकादमी (रजि०) पंचकूला'
 

Monday, 13 December 2021

17 वां राष्ट्रीय वार्षिक महोत्सव 2021(विराट कविसम्मेलन व डॉ०प्रतिभा 'माही' की पुस्तक 'ज्योतिपुंज' का लोकार्पण) 21/11/2021

     
            एम० के० साहित्य अकादमी पंचकूला द्वारा आज दिनांक 21/11/2021 को प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय नीलोखेड़ी सेंटर पर विराट भव्य कविसम्मेलन व मुशायरे तथा सूफ़ी-गीत-संगीत एवं राष्ट्रीय अवार्ड सम्मान समारोह का आयोजन डॉ० मनोज कुमार गुप्ता की स्मृति में किया गया। 
          यह 17 वां राष्ट्रीय वार्षिक महोत्सव 2021  मुख्य अतिथि श्रीमती सविता आर्य (अध्यक्ष, नारी तू नारायणी उत्थान समिति, पानीपत) तथा विशिष्ट अतिथि श्री राजीव कुमार, सहायक निदेशक, गृह मंत्रालय, भारत सरकार, दिल्ली एवं संस्थापक, 'जागरूक मंच, हरियाणा' व ब्रह्माकुमारी प्रेम दीदी (करनाल ज़ोनल, को-ऑडिटर आर्ट & कल्चर विंग, पंजाब ज़ोन) के सानिध्य में तथा ब्रह्माकुमारी संगीता दीदी, नीलोखेड़ी ब्रह्माकुमारी सेंटर की अध्यक्षता में किया गया।
            श्री चाँद कश्यप ने दीप प्रज्वलित करवा कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। 
             इस समारोह में बड़ौदा, गुजरात से आई प्रख्यात सूफ़ी सिंगर सुश्री सोनल शाह  ने डॉ० प्रतिभा 'माही' के कलाम को मधुर स्वर देकर सूफ़ी रंग बिखेरे तथा इस राष्ट्रीय समारोह में डॉ०प्रतिभा 'माही' की पुस्तक 'ज्योतिपुंज' का भी लोकार्पण किया गया। 
            श्री गणेश दत्त, पंचकूला तथा डॉ० मनोज भारत, भिवानी प्रख्यात साहित्यकारों ने 'माही' पुस्तक पर अपने विचार प्रस्तुत करके ,पुस्तक की समीक्षा की। 
         डॉ० कांता वर्मा ने मंच संचालन कर कविसम्मेलन को एक उच्च शिखर प्रदान कर कार्यक्रम को आगे बढ़ाया।  यह कार्यक्रम एम०के० साहित्य अकादमी पंचकूला द्वारा स्व० डॉ० मनोज गुप्ता की स्मृति के रूप में मनाया गया तथा पिछले 17 वर्षों से देश के विभिन्न शहरों में प्रतिवर्ष इस प्रकार के कार्यक्रमों का आयोजन करती आ रही है। यह समारोह सम्पूर्ण दृष्टि से सफल रहा, जोकि संचालिका बी०के० संगीता दीदी के सहयोग से किया गया । इसकी सफलता का श्रेय महिन्द्र भाई, सुमन दीदी व अन्य सभी सहयोगियों को तथा  एम०के० साहित्य अकादमी पंचकूला को जाता है। कार्यक्रम बड़ी धूमधाम से सूफियाना और आध्यात्मिक वातावरण में संपन्न हुआ । इस अवसर पर जावेद खान ,ब्रह्माकुमारी रेणु बहन ,ब्रह्माकुमारी प्रीती,ब्रह्माकुमारी पूनम,परमजीत कौर, कुसुम बहन,कवि मुलखराज आहूजा, वीरेंद्र वर्मा,अमित भाई, अजय,संजीव जोशी,गुरमेज भाई,अजमेर अरजाहेड़ी आदि उपस्थित थे

Thursday, 18 November 2021

"ज्योतिपुंज' का लोकार्पण

डॉ० प्रतिभा 'माही' की पुस्तक "ज्योतिपुंज" का लोकार्पण
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एम० के० साहित्य अकादमी पंचकूला {रजि०} द्वारा ब्रह्माकुमारी सेंटर, नीलोखेड़ी, करनाल के सहयोग से दिनांक 21/11/2021 (दिन रविवार) को प्रातः 10 बजे, ब्रह्माकुमारी सेंटर, नीलोखेड़ी, करनाल प्रांगड़ में  17 वें राष्ट्रीय वार्षिक महोत्सव 2021  का आयोजन डॉ० मनोज कुमार गुप्ता की स्मृति में  विराट भव्य कविसम्मेलन व मुशायरा तथा सूफ़ी-गीत-संगीत एवं राष्ट्रीय अवार्ड समारोह 2021 होने जा रहा है। इसके अंतर्गत डॉ० प्रतिभा 'माही' की पुस्तक "ज्योतिपुंज" का लोकार्पण भी किया जाएगा तथा वक्ताओं द्वारा पुस्तक की समीक्षा भी की जाएगी।

Wednesday, 10 November 2021

सीनियर सिटीजन वेलफेयर एसोसिएशन चंडीगढ़ (रजि०) एवं एम० के० साहित्य अकादमी पंचकूला (रजि०) के संयुक्त तत्वावधान में दिनांक 30/10/2021 भव्य कविसम्मेलन

वरिष्ठ नागरिकों को समर्पित भव्य कवि सम्मेलन  व गीत-संगीत 

                सीनियर सिटीजन वेलफेयर एसोसिएशन चंडीगढ़ (रजि०) एवं एम० के० साहित्य अकादमी पंचकूला (रजि०) के संयुक्त तत्वावधान में दिनांक 30/10/2021 (दिन शनिवार) प्रातः 10.30 AM डुप्लेक्स कम्युनिटी हॉल, मॉर्डन कॉम्प्लेक्स मनीमाजरा , चंडीगढ़ में दीपावली के उपलक्ष्य में वरिष्ठ नागरिकों को समर्पित भव्य कवि सम्मेलन  व गीत-संगीत का आयोजन किया गया। 
             कार्यक्रम में मुख्य अतिथि श्री मुकेश सक्सेना 'कबीर' (राष्ट्रीय मंचीय गीतकार ) भोपाल, मध्यप्रदेश से उपस्थित हुए। श्री बी०डी० शर्मा  (प्रख्यात संगीत की दुनियां के बादशाह तथा  श्रीमती सुदेश 'नूर' ( प्रख्यात साहित्यकारा) विशिष्ट अतिथि रहे। डॉ० वी० पी० नागपाल जी ने अध्यक्षता की तथा डॉ० प्रतिभा माही व सुखविन्दर सिंह ने मिलकर मंच सँभाला।
                

        प्रसिद्ध गायक/गायिकाओं ने श्री राजीव झिंगरन, श्री तरसेम राज, मीनाक्षी, कंचन जैन, प्रेम व बी० डी० शर्मा ने अपनी मधुर आवाज़ आए समारोह में चार चाँद लगा दिए। वहीं दूसरी तरफ आमंत्रित  शायरा व कवियों  ने भी कमाल कर दिया। उनकी बानगी देखिए:

        कंचन भल्ला ने डॉ० प्रतिभा माही की ग़ज़ल को आपनी आवाज़ दी-- 
        "जा रहे हो छोड़ कर तुम, जी भला क्या पाओगे।
        है भरोसा एक दिन तुम लौट कर फिर आओगे।।"

        मुकेश "कबीर" ने अपने देश भक्ति गीत से सभी को भावविभोर कर श्रोताओं को मस्ती में झूमने को मजबूर कर दिया। सम्पूर्ण प्रांगड़ तालियों से गूँज उठा।उनके गीत का मुखड़ा देखे...
       " भारत के रहने वाले हैं भारत की महिमा गाएंगे,
        चाहे जितने कष्ट मिलें हर जनम यहीं पर चाहेंगे,
        ख़ुद मिटकर भी करते रहेंगे इसको हम आबाद,
        हिंदुस्तान ज़िंदाबाद हिंदुस्तान ज़िंदाबाद ।"

डॉ० प्रतिभा 'माही' की प्रेम से ओतप्रोत , इश्क़ में डूबी रचनाओं ने लोगों आनन्द से भर दिया। उनकी एक झलक देखें....
         " निगाहें बचाकर निहारा तो होगा।
          किसी का मुक़द्दर संबारा तो होगा।।
          कभी  दर्द की सर्द तन्हाइयों में।
          किसी ने तुझे भी पुकारा होगा ।।"
गणेश दत्त ने जीवन के अलग-अलग को अपनी रचना के माद्यम से बताया....
          "वक्त आने पर धरा से कोई क्या ले जाएगा । 
          इस धरा से उपजा है जो, धरा में ही मिल जाएगा ।। "

सुदेश 'नूर' ने सूफी अंदाज़ में अपनी रचना प्रस्तुत की, बानगी देखें.....
          "कभी फ़ुरसत मिली तो पढ़ियेगा , दिल से बेहतर कोई किताब नही।
          जबसे आये हैं आप नज़रों में मेरी तन्हाई का जवाब नही।।"
          सम्पूर्ण समारोह पूर्ण रूप से सफल रहा जिसका श्रेय सीनियर सिटीजन वेलफेयर एसोसिएशन चंडीगढ़ (रजि०) एवं एम० के० साहित्य अकादमी पंचकूला (रजि०) की टीम को जाता है।




Sunday, 15 August 2021

शहीदों को नमन (75वें आज़ादी के अमृत महोत्सव की बधाई)

           आज का दिन है स्वतंत्रता का, 
            आज मील थे सब अधिकार।
            आज के दिन भागे थे फ़िरंगी, 
            लेकर के अपनी सरकार।।
             आज का दिन तुम भूल न जाना, 
            आज मिली थी आज़ादी।
             वीरों ने कुर्बानी देकर ,
             सौंप दी भारत की चाबी।।
वीर सिपाही जब सरहद पर युद्ध मे जाने के लिए तैयार होता है तो अपने परिवार से कैसे विदा लेता है और क्या कहता है?
 1)- पत्नी से  विदा लेते समय एक वीर फौजी क्या कहता है देखे...
 चला हुन आज सरहद पर, कफ़न सिर पर सजाकर मैं,
 तेरे गजरे की ख़ुशबू को, चला मन में छुपाकर में
 चुरा बहना की चंचलता , मुहब्बत थाम अपनों की
 अजी नन्हीं सी चिड़िया को, चला दिल मे बसाकर मैं
2)-बहन से गले लिपट जाती है और कहती है , भाई आज तू मेरा भी प्रण सुनले, जिस तरह रानी लक्ष्मीबाई देश के लिए  लड़ते लड़ते शहीद हो गयीं , वैसे मैं भी अपने देश की ख़ातिर  लड़ना चाहती हूँ।...
     सजाकर शस्त्र काँधे पर, चलूँगी साथ मैं वीरा
     समझले आज सीमा पर, लड़ूँगी साथ मैं वीरा
     उठा आक्रोश है दिल में, रगों में रक्त फौजी है
      कदम पद चिन्ह पर तेरे, धरूँगी साथ मैं वीरा

3) भाई अपनी जिद्दी बहन को समझाता है क्या कहता है देखें......!
समझता हूँ तेरी हालत, लहू तेरा उबलता है
तू हिन्दुस्तां की बेटी है, तेरा दिल भी मचलता है
मगर तू बन कवच घर का, निभाना फ़र्ज़ मेरा तू
हवाले कर चमन तेरे, तेरा वीरा निकलता है
4)- जब वो वीर सिपाही माँ के पास जाता है तो 
माँ क्या कहती है सुनें.....
सुनो बेटा न जाया हो, ये कुर्बानी शहीदों की
बचे ना नस्ल अब कोई, छुपे पाकी रकीबों की
तू चुन चुन कर मिटा देना, हुकूमत को हिला देना
मेरा आशीष तेरे सर , मदद करना रफ़ीकों
की
5)-  बेटा माँ को विश्वास दिलाता है और क्या जबाब देता है देखें .....
       रचूँगा एक नया मंज़र, नए करतब दिखाकर मैं
       तजा सुख चैन अब सारा, चला आशी पाकर मैं 
       मिटाऊँगा सभी आतंक, कसम तेरी उठाई माँ
       चुकाने को तेरा ऋण अब , चला सिर को उठाकर मैं
                     © डॉ० प्रतिभा 'माही'

पुस्तक लोकार्पण एवं अखिल भारतीय कवि सम्मेलन तथा वरिष्ठ नागरिक काव्यपाठ

( वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप जयंती के उपलक्ष्य में राष्ट्रीय साहित्यिक महोत्सव ) पुस्तक लोकार्पण एवं अखिल भारतीय कवि सम्मेलन  तथा वरिष्ठ नाग...