Wednesday, 3 December 2025

21वां वार्षिक महोत्सव 2025: राष्ट्रीय हास्य कवि सम्मेलन व सम्मान समारोह:

राष्ट्रीय हास्य कवि सम्मेलन व सम्मान समारोह:
             21वां वार्षिक महोत्सव 2025
           एम•के• साहित्य अकादमी, पंचकूला द्वारा हरियाणा साहित्य एवं संस्कृति अकादमी के सहयोग से 21वां वार्षिक समारोह 30 नवंबर 2025, रविवार को आयोजित किया। इस अवसर पर राष्ट्रीय हास्य कवि सम्मेलन के साथ भव्य अवार्ड एवं सम्मान समारोह का आयोजन वरिष्ठ नागरिक परिषद, सेक्टर-15, पंचकूला के सभागार में किया गया। यह समारोह स्वर्गीय डॉ. मनोज गुप्ता की स्मृति में प्रतिवर्ष नवंबर माह में आयोजित किया जाता है।
           इस समारोह  में मुख्य अतिथि: डॉ. रंजीत सिंह जादौन (I/C  PAMC पंचकूला एवं उपनिदेशक AH & D, पंचकूला) रहे, उन्होंने सम्पूर्ण समारोह की सराहना की तथा श्री रविंदर शर्मा, श्री करतार सिंह एलावादी ,श्रीमती प्रेम सोमरा जी एवं श्री पवन गुप्ता ने विशेष अतिथि की भूमिका निभाई। सम्पूर्ण समारोह डॉ. राजेन्द्र कुमार 'कनोजिया' (चंडीगढ़) जोकि एक प्रख्यात साहित्यकार एवं कवि हैं तथा PGI आर्थो विशेषज्ञ भी हैं, की अध्यक्षता के सानिध्य में हुआ।
          डॉ. प्रतिभा ‘माही’ बड़े ही सरल, शान्त रूप से संस्था का परिचय दिया था यह भी बताया कि वो अब तक लगभग 300 से ऊपर कार्यक्रम करवा चुकी हैं। डॉ. प्रतिभा ‘माही’ अपने व्यक्तित्व का परिचय चार पंक्तियों में दिया । बानगी देखें:- 
"पर्त डर पर्त जब भी खुली हूँ मैं ,
आंसुओं से सदा ही धुली हूँ मैं ।
रुख बदल डालूंगी हवाओं का,
आज इस बात पर तुली हूँ मैं ।।"
           इस कार्यक्रम में देशभर से आए प्रख्यात हास्य, प्रेम, श्रृंगार, सूफी और ओज रस के कवि-कवयित्रियाँ ने अपनी प्रस्तुतियों से श्रोताओं का मनोरंजन किया। डॉ. उर्मिला कौशिक ‘सखी’ ने समारोह का श्री गणेश दीप प्रज्वलन व माँ शारदे जी की वंदना से करवाया तथा आमंत्रित माननीय सभी अतिथियों बी कवियों का स्वागत कर मंच पर आसानी करवाया और मंच आगे के संचालन हेतु  पी.के. आज़ाद को सौंप दिया।  पी.के. आज़ाद संचालन को उच्च शिखर तक ले गए और अंत में अपनी माँ के सम्मान गीत सुनाया, जिसने सभी श्रोताओं को भाव विभोर कर दिया। 
           डॉ. अशोक बत्रा ने लोगों को इतना हंसाया कि वो आनंद में झूमने लगे। डॉ. पूनम माटिया ने अपनी ग़ज़ल से सभी का मन मोह लिया। पंडित मुकेश मासूम ने अपना हास्य भरे पैरोडी गीत से खूब हंसाया। श्री के.के. सरीन ने अपने कुछ शेर और गीत सुनाया। श्रीमती ईशा नाज़ ने अपनी प्रस्तुतो में मधुर आवाज़ का परचम लहरा। श्री अमृतपाल सिंह ‘कॉफी’ ने अपने हास्य व्यंग सुना कर हंसा हंसा के पागल कर दिया तथा श्री विशेष आज़ाद ‘मुरादाबादी’ ने माँ व प्रेम के ऊपर मुक्तक सुनाकर सबके दिलों  में  अपनी जगह बना ली । 
           समारोह के अंत में सभी अतिथियों और कवियों को एम•के•साहित्य अकादमी अवार्ड 2025 से नवाजा गया तथा ट्राइसिटी की 20 महान हस्तियों को भी सम्मानित किया गया,जिन्होंने साहित्य, समाज, संस्कृति और आध्यात्मिक मूल्यों के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिया। ये सभी महान हस्तियाँ अपने आप में पूरी एक संस्था हैं, सम्मानित होने वाले प्रमुख व्यक्तित्वों में डॉ. वी.पी. नागपाल, श्री नवीन शर्मा, श्री सुरेश गोयल, डॉ. अनीश गर्ग, श्री सुभाष भास्कर, श्री सुशील हसरत ‘नरेलवी’, श्री पीयूष जैन, श्री विजय कपूर, श्री प्रेम विज, श्री अशोक भंडारी ‘नादिर’, श्री राजवीर सिंह ‘राज’, श्री नरेश कुमार, श्री सुरेन्द्र सिंगला, डॉ. ईश्वर सिंह, श्री पवन गुप्ता, डॉ. प्रतिभा सिंह, डॉ. एकता नागपाल, श्रीमती अर्पणा गुप्ता, श्रीमती मीनू तानसेन, श्रीमती मीनाक्षी जैन, श्रीमती नीलम त्रिखा एवं युवा प्रतिनिधि इशप्रीत सिंह शामिल हैं।
          श्रोताओं ने बताया कि यह आयोजन साहित्य और कला प्रेमियों के लिए अत्यंत आनंदमय और प्रेरणादायक अनुभव होगा। तालियों से पूरा सभागार गूंजने लगा । डॉ. प्रतिभा ‘माही’ की मेहनत रंग लाई, यह कार्यक्रम सम्पूर्ण दृष्टि से सफल रहा, जिसका श्रेय डॉ. प्रतिभा ‘माही’ और उनकी पूरी टीम को जाता है।

Saturday, 23 November 2024

20वां वार्षिक राष्ट्रीय महोत्सव 2024, एम० के० साहित्य अकादमी (रजि०) पंचकूला द्वारा कुरुक्षेत्र में

       राष्ट्रीय कवि सम्मेलन कुरुक्षेत्र की धरती पर

अर्जुन बनकर युद्ध में लड़ना सुन लो बहुत जरूरी है 

                   एम० के० साहित्य अकादमी पंचकूला की अध्यक्ष डॉ. प्रतिभा 'माही' ने कई वर्षों से बीड़ा उठाया हुआ है कि  वो ट्राइसिटी से बाहर अलग अलग प्रांतों व शहरों में कवि सम्मेलन आयोजित करेंगी। वर्ष 2021 से  लगातार वो  एम० के० साहित्य अकादमी पंचकूला द्वारा दिल्ली, अंबाला, नीलोखेड़ी, करनाल , कुरुक्षेत्र , माउंटआबू  व पंचकूला  में लगभग 14-15  राष्ट्रीय कवि सम्मेलन आयोजित कर चुकी हैं।  

                   इस वर्ष 20वां वार्षिक राष्ट्रीय महोत्सव 2024, एम० के० साहित्य अकादमी (रजि०) पंचकूला  एवं श्री कृष्ण इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (स्काइट) कुरुक्षेत्र के संयोजन में,  डॉ० मनोज कुमार गुप्ता  की याद में ,  18 नवंबर 2024 को "राष्ट्रीय  कवि सम्मेलन एवं अवॉर्ड सम्मान समारोह"  स्काइट के निदेशक डॉ० डी० डी० शर्मा  तथा उनकी टीम की सहयोग से किया गया।

                  इस समारोह में अलग-अलग राज्यों के प्रख्यात आशुकवि अनिल बोहरे (हाथरस ), हास्यकवि दीपक सैनी (दिल्ली) देशभक्ति गीतकार डॉ० मुकेश 'कबीर' (भोपाल) संवेदनशील कवि स्वामी शशिकांत सदैव (दिल्ली) ओज की कवयित्री डॉ० कांता वर्मा (करनाल) , वीररस की कवयित्री उन्नति भारद्वाज (हाथरस यू०पी०) और कमलेश पालीवाल "कमल" (गुरुग्राम ) से कुरुक्षेत्र की धरती पर पधारे। 
        यह समारोह मुख्य अतिथि महोदय: श्री वीरेन्द्र सिंह चौहान  (पूर्व उपाध्यक्ष, हरियाणा ग्रन्थ अकादमी, पंचकूला) विशेष अतिथि : डॉ० धर्मदेव विद्यार्थी (निर्देशक, हरियाणा साहित्य एवं संस्कृति अकादमी, पंचकूला) एवं डॉ० अखिलेश भारद्वाज  ( SKIET कुरुक्षेत्र) तथा डॉ० डी०डी० शर्मा जी (निर्देशक SKIET कुरुक्षेत्र) की अध्यक्षता में सम्पन्न हुआ। 

        इस समारोह का शुभारंभ डॉ. प्रतिभा 'माही' ने अपने पतिदेव डॉ० मनोज कुमार गुप्ता का परिचय देते हुए, दीप प्रज्ज्वलित करवा कर, सरस्वती वंदना से किया। मां शारदे को नमन करती कुछ पंक्तियां:- 
"ज्ञान की देवी सरस्वती, शारदे जिनका नाम।
संगीत बसा है वीणा में, है ज्ञान बाँटना काम।।
हम सब उसके प्यारे बच्चे, वो है मात हमारी। 
आओ उसको नमन करें हम, जो है वीणाधारी।।"


        और डॉ. प्रतिभा 'माही' ने ही इस कवि सम्मेलन का अंत, कुछ अपने प्रेम रस में डूबे हंसगुल्ले श्रोताओं को परोसे, जिसे सुन कर सब हँसते हँसते लोटपोट हो गए और फिर एक संदेश देते हुए श्रोताओं को जागरुक करते हुए कवि सम्मेलन का समापन किया।उनकी बानगी  देखिए: 
            "देश की खातिर रक्त उबलना, सुन लो बहुत जरूरी है।
            अर्जुन बनकर युद्ध में लड़ना, सुन लो बहुत जरूरी है।।
            आगे आओ कदम बढ़ाओ, शस्त्र उठाओ हाथों में ।
            रणभूमि में बिगुल का बजना, सुन लो बहुत जरूरी है।।"


        सबसे पहले उन्नति भारद्वाज ने अपने वीर रस से ओतप्रोत शानदार प्रस्तुति देकर सभागार में चार चाँद लगा दिए। यह बच्ची सिर्फ 16 साल की है और अब तक 300 से ऊपर मंचों पर काव्य पाठ कर चुकी है। इसकी उपलब्धियों की जितनी सराहना की जाए उतनी ही कम है। देखिए क्या कहती है:- 
*रस की धरा से कुरुक्षेत्र में झुकाने माथ आयी हूं।
गीता ज्ञान भूमि को जोड़ने हाथ आयी हूं।।
भारत मां की बेटी हूं ओज के गीत गाती हूं।
ब्रज से प्रेम मर्यादा अवध की साथ लायी हूं ।।"


        फिर मंच पर उतरे हास्य के बादशाह दीपक सैनी अपने हास्य का पिटारा लेकर, अलग-अलग नेताओं की, महापुरुषों की मिमिक्री करके जीत लिया सभी श्रोताओं का मन। उनकी बातों से पूरा सभागार तालिया से गूंज उठा। 


       तीसरे नंबर पर उठे संवेदनशील कवि स्वामी शशिकांत सदैव और अपनी बातों से सभी के मन को शांत कर प्रेम की वर्षा की तथा आध्यात्मिक ज्ञान का संदेश दिया। और अंत में अपनी करुणा से भरी ग़ज़ल से सभी पर अपनी छाप छोड़ दी, तालियों से सभी श्रोताओं ने सम्मान किया।
देखें बानगी: 
   "बेवफ़ा कह दो या बेहया कह दो ।
    आपको हक़ है चाहे जैसा कह दो ।।"
 एक शेर और....
   "बहाने बना - बना के मुझे यूँ न बहलाओ।
   मैंने दिल दिया था तुमको मुझे दिल ही लौटाओ ।।"


        फिर आए कमलेश पालीवाल "कमल" एक हास्य गीत लेकर, कहते हैं कि मैं भी नारी हो जाऊँ, यह तो वहीं जानते हैं कि नारी क्यूँ बनना है।


              और फिर  हमारी पांचवीं कवयित्री शेरनी जैसी हुंकार लिए मंच पर उतरी, डॉ० कांता वर्मा, देखिए कैसे अपनी बात रखी....!
 " मैं वो कवयित्री हूं जो दिल में आग,
 जुबां पर अंगार रखती हूं ।
 शब्दों से भगत सिंह पैदा करती, 
 कलम से इंकलाब लिखती हूं।।"


          शेरनी के बाद मंच पर उतरे,  नहले को दहला करने वाले, आशुकवि अनिल बोहरे जी, जो कवियों की रेलगाड़ी के इंजन थे। हर कवि को एक एक कर मंच पर आगे बढ़ा रहे, हास्य के धुरंदर , बात से बात बनाने वाले, कोई भी तीन शब्द भीड़ से लेकर ,एक ही क्षण में कविता गढ़ देते। सभी श्रोता यह देख कर दंग रह गए। सभी उछल उछल कर अपने शब्द कवि की तरफ फेंकते, और कवि उन शब्दों से कविता बना देता। आशुकवि का
यह हुनर देखकर तालियों से पूरा सभागार गुंजायमान  हो गया। बानगी देख़ें....
"सबके बिकास को, क्रांतिकारी परिवर्तन, होना चाहिए।
राष्ट्रपति की आय पांच लाख ही, अधिकतम होनी चाहिए। 
इससे ऊपर की आय सरकारी खजाने में जानी चाहिए। "
 
       अंत में सभी अतिथियों व कवियो को अवॉर्ड से नवाजा जाएगा। कार्यक्रम सम्पूर्ण दृष्टि से सफल रहा। जिसका श्रेय, डॉ प्रतिभा माही, दीक्षा गुप्ता, डॉ० डी०डी० शर्मा व उनकी पूरी टीम को जाता है।

             एम० के० साहित्य अकादमी (रजि०)
               पंचकूला (8800117246)

21वां वार्षिक महोत्सव 2025: राष्ट्रीय हास्य कवि सम्मेलन व सम्मान समारोह:

राष्ट्रीय हास्य कवि सम्मेलन व सम्मान समारोह:               21वां वार्षिक महोत्सव 2025             एम•के• साहित्य...