Wednesday, 10 November 2021

सीनियर सिटीजन वेलफेयर एसोसिएशन चंडीगढ़ (रजि०) एवं एम० के० साहित्य अकादमी पंचकूला (रजि०) के संयुक्त तत्वावधान में दिनांक 30/10/2021 भव्य कविसम्मेलन

वरिष्ठ नागरिकों को समर्पित भव्य कवि सम्मेलन  व गीत-संगीत 

                सीनियर सिटीजन वेलफेयर एसोसिएशन चंडीगढ़ (रजि०) एवं एम० के० साहित्य अकादमी पंचकूला (रजि०) के संयुक्त तत्वावधान में दिनांक 30/10/2021 (दिन शनिवार) प्रातः 10.30 AM डुप्लेक्स कम्युनिटी हॉल, मॉर्डन कॉम्प्लेक्स मनीमाजरा , चंडीगढ़ में दीपावली के उपलक्ष्य में वरिष्ठ नागरिकों को समर्पित भव्य कवि सम्मेलन  व गीत-संगीत का आयोजन किया गया। 
             कार्यक्रम में मुख्य अतिथि श्री मुकेश सक्सेना 'कबीर' (राष्ट्रीय मंचीय गीतकार ) भोपाल, मध्यप्रदेश से उपस्थित हुए। श्री बी०डी० शर्मा  (प्रख्यात संगीत की दुनियां के बादशाह तथा  श्रीमती सुदेश 'नूर' ( प्रख्यात साहित्यकारा) विशिष्ट अतिथि रहे। डॉ० वी० पी० नागपाल जी ने अध्यक्षता की तथा डॉ० प्रतिभा माही व सुखविन्दर सिंह ने मिलकर मंच सँभाला।
                

        प्रसिद्ध गायक/गायिकाओं ने श्री राजीव झिंगरन, श्री तरसेम राज, मीनाक्षी, कंचन जैन, प्रेम व बी० डी० शर्मा ने अपनी मधुर आवाज़ आए समारोह में चार चाँद लगा दिए। वहीं दूसरी तरफ आमंत्रित  शायरा व कवियों  ने भी कमाल कर दिया। उनकी बानगी देखिए:

        कंचन भल्ला ने डॉ० प्रतिभा माही की ग़ज़ल को आपनी आवाज़ दी-- 
        "जा रहे हो छोड़ कर तुम, जी भला क्या पाओगे।
        है भरोसा एक दिन तुम लौट कर फिर आओगे।।"

        मुकेश "कबीर" ने अपने देश भक्ति गीत से सभी को भावविभोर कर श्रोताओं को मस्ती में झूमने को मजबूर कर दिया। सम्पूर्ण प्रांगड़ तालियों से गूँज उठा।उनके गीत का मुखड़ा देखे...
       " भारत के रहने वाले हैं भारत की महिमा गाएंगे,
        चाहे जितने कष्ट मिलें हर जनम यहीं पर चाहेंगे,
        ख़ुद मिटकर भी करते रहेंगे इसको हम आबाद,
        हिंदुस्तान ज़िंदाबाद हिंदुस्तान ज़िंदाबाद ।"

डॉ० प्रतिभा 'माही' की प्रेम से ओतप्रोत , इश्क़ में डूबी रचनाओं ने लोगों आनन्द से भर दिया। उनकी एक झलक देखें....
         " निगाहें बचाकर निहारा तो होगा।
          किसी का मुक़द्दर संबारा तो होगा।।
          कभी  दर्द की सर्द तन्हाइयों में।
          किसी ने तुझे भी पुकारा होगा ।।"
गणेश दत्त ने जीवन के अलग-अलग को अपनी रचना के माद्यम से बताया....
          "वक्त आने पर धरा से कोई क्या ले जाएगा । 
          इस धरा से उपजा है जो, धरा में ही मिल जाएगा ।। "

सुदेश 'नूर' ने सूफी अंदाज़ में अपनी रचना प्रस्तुत की, बानगी देखें.....
          "कभी फ़ुरसत मिली तो पढ़ियेगा , दिल से बेहतर कोई किताब नही।
          जबसे आये हैं आप नज़रों में मेरी तन्हाई का जवाब नही।।"
          सम्पूर्ण समारोह पूर्ण रूप से सफल रहा जिसका श्रेय सीनियर सिटीजन वेलफेयर एसोसिएशन चंडीगढ़ (रजि०) एवं एम० के० साहित्य अकादमी पंचकूला (रजि०) की टीम को जाता है।




Sunday, 15 August 2021

शहीदों को नमन (75वें आज़ादी के अमृत महोत्सव की बधाई)

           आज का दिन है स्वतंत्रता का, 
            आज मील थे सब अधिकार।
            आज के दिन भागे थे फ़िरंगी, 
            लेकर के अपनी सरकार।।
             आज का दिन तुम भूल न जाना, 
            आज मिली थी आज़ादी।
             वीरों ने कुर्बानी देकर ,
             सौंप दी भारत की चाबी।।
वीर सिपाही जब सरहद पर युद्ध मे जाने के लिए तैयार होता है तो अपने परिवार से कैसे विदा लेता है और क्या कहता है?
 1)- पत्नी से  विदा लेते समय एक वीर फौजी क्या कहता है देखे...
 चला हुन आज सरहद पर, कफ़न सिर पर सजाकर मैं,
 तेरे गजरे की ख़ुशबू को, चला मन में छुपाकर में
 चुरा बहना की चंचलता , मुहब्बत थाम अपनों की
 अजी नन्हीं सी चिड़िया को, चला दिल मे बसाकर मैं
2)-बहन से गले लिपट जाती है और कहती है , भाई आज तू मेरा भी प्रण सुनले, जिस तरह रानी लक्ष्मीबाई देश के लिए  लड़ते लड़ते शहीद हो गयीं , वैसे मैं भी अपने देश की ख़ातिर  लड़ना चाहती हूँ।...
     सजाकर शस्त्र काँधे पर, चलूँगी साथ मैं वीरा
     समझले आज सीमा पर, लड़ूँगी साथ मैं वीरा
     उठा आक्रोश है दिल में, रगों में रक्त फौजी है
      कदम पद चिन्ह पर तेरे, धरूँगी साथ मैं वीरा

3) भाई अपनी जिद्दी बहन को समझाता है क्या कहता है देखें......!
समझता हूँ तेरी हालत, लहू तेरा उबलता है
तू हिन्दुस्तां की बेटी है, तेरा दिल भी मचलता है
मगर तू बन कवच घर का, निभाना फ़र्ज़ मेरा तू
हवाले कर चमन तेरे, तेरा वीरा निकलता है
4)- जब वो वीर सिपाही माँ के पास जाता है तो 
माँ क्या कहती है सुनें.....
सुनो बेटा न जाया हो, ये कुर्बानी शहीदों की
बचे ना नस्ल अब कोई, छुपे पाकी रकीबों की
तू चुन चुन कर मिटा देना, हुकूमत को हिला देना
मेरा आशीष तेरे सर , मदद करना रफ़ीकों
की
5)-  बेटा माँ को विश्वास दिलाता है और क्या जबाब देता है देखें .....
       रचूँगा एक नया मंज़र, नए करतब दिखाकर मैं
       तजा सुख चैन अब सारा, चला आशी पाकर मैं 
       मिटाऊँगा सभी आतंक, कसम तेरी उठाई माँ
       चुकाने को तेरा ऋण अब , चला सिर को उठाकर मैं
                     © डॉ० प्रतिभा 'माही'

Friday, 9 July 2021

साहित्य सागर [भाग - 01]


                   साहित्य सागर [भाग - 01]
                      डॉ०प्रतिभा माही (पंचकुला) 
उल्फत का फसाना 
उल्फत का फसाना क्या कहना
उसका नज़राना क्या कहना

रुख़ से पर्दा हट जाए तो
लब का मुस्काना क्या कहना

तू मस्त फ़िज़ाओं सी क़ातिल
पल पल उकसाना क्या कहना

ये पेचोखम भी कम ना थे
अब नैन मिलाना क्या कहना

जब छम छम छनके झांझरिया
कटि का बलखाना क्या कहना

निर्झर झरता सावन 'माही'
अमृत बरसाना क्या कहना

© डॉ०प्रतिभा माही (पंचकूला) मो० 8800117246
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                     सुनीता गर्ग (पंचकुला) 
यादों की संदूकची 

प्यारी थी वो संदूकची, यादों से वो थी भरी
हर इक कोना जवानी की मीठी बातों से भरी  

माँ-बाप की याद भी उसमें थी समाई
वो भी जब पीया संग बजी थी शहनाई

वो यादों भरी संदूकची, मुझको बहुत रुलाती है
पिया जब पास नहीं, तो याद उनकी दिलाती है 

खोली जब संदूकची तो, आखें मेरी हो गयी नम
कोई समझे दु:ख मेरा, क्या होता बेवा का गम

अतीत जो इसमें संजोया था वो सब याद आ गया
पायल की छन-छन का शोर, कानों को लुभा गया

संदूकची मे रखी लाल चुनरी, देख मन व्याकुल हुआ 
रंग बदल गया चुनरी का कैसा, सुर्ख़ से सफेद हुआ

अतीत की मुस्कराहट की लाली 
अब लगती है क्यूँ खाली-खाली

रब से क्या शिकायत करुँ, प्रियतम मेरा खो गया
जीवन-भर की यादें अपनी, संदूकची में ही बो गया

©सुनीता गर्ग (पंचकुला) मो० 8360443109
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                  गरिमा गर्ग (पंचकूला )
सत्यपथ

जो आग को पानी धारा की तरह पी जाते हैं
उनके चेहरे तेज़ सूरज तरह चमक जाते हैं
चलते हैं वो सदा सत्यपथ पर होकर निडर
कुकर्मो को जड़ से जड़ तक मिटा जाते हैं

ना पनपे बुराई ना उठे गलत कोई भी कदम
अपनी नज़रो से ख़ाक उसी पल कर जाते हैं
सह लेते हैं हर मुश्किल दौर को जो हसँ कर
वही मज़बूत क़दम मज़बूती से उठा पाते हैं

राम अयोधया में रावण न रहता समुंदर पार 
राम,रावण भी एक छत के नीचे पाये जाते हैं
कुछ तो मेहनत करते हैं घर के पेड़ उगाने में
कुछ फलों को टहनी सहित तोड़ खा जाते हैं

दहशत देते हैं जो खुद को राजशाही समझ
राजशाही से पहले के वक्त को भूल जाते हैं
फायदा उठाते हैं राजशाही होने का हर पल
वही सभी से पीठ पीछे खूब दुत्कारे जाते हैं

© गरिमा गर्ग (पंचकूला )मो० 7508590705
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                  आभा मुकेश साहनी(पंचकूला)
कैसा जादू कर डाला 

है तेरी बांसुरी की धुन ने हम सब को नचाया 
हे श्याम ! साँवले रंग ने कैसा जादू कर डाला 

हुए सुध-बुध अपनी खो कर हम तो बेहाल हैं 
हर पल कान्हा ! पुकारते बस तेरा ही नाम हैं 

हमें परवाह नहीं प्रभु ! क्या ये जग सोचता है
हमारा तुम्हारे संग तो जन्म-जन्म का नाता है 

हुआ दीवानगी का हम पर कुछ ऐसा असर है 
हर आहट पर निगाहें तुम को ही तलाशती हैं 

तुम भी अब आ कर के थाम लो हाथ हमारा
किया तुम पर विश्वास,देखो दिल न तोड़ना 

वक्त मिले तो निज चरणों में प्रभु देख लेना 
वहीं सजा लिया है हमने अपना आशियाना 

©आभा मुकेश साहनी (पंचकूला)मो० 9988560361
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                रेणुका चुघ मिढ्ढा (चण्डीगढ़ )

अनकही दास्ताँ 

तन्हाईयों के आलम में, अहसास हुऐ बाबस्ता , 
अश्के-मोती दोहरा रहे है ...अनकही दास्ताँ । 

फ़क़त निगाहों से होता था ..दिल का फ़ैसला , 
मयसर नही जानां ...... तो अंजुमन से क्या राब्ता ।

बदला है दौर नहीं वो , जिसमें हो दिलों का सलाम , 
गर निगाहों में ना हो शोख़ियाँ,तो दिलबरी है क्या ।

पत्थरों के शहर में  मिल जाये गर दयार -ए -इश्क , 
तमाम उम्र कर दे निसार,फकत ये ज़िन्दगी है क्या ।

लब पे आती है ये दुआ .....  बन के तमन्ना ये मेरी 
ज़िंदगी शम्अ की सूरत हो .....  अ ख़ुदाया मेरी।

©रेणुका चुघ मिढ्ढा (चण्डीगढ़ )मो० 8699500077 
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                  ©मोनिका कटारिया 'मीनू' 
सुख दुःख एक पहेली है

उल्फत का फसाना 
जीवन की अनंत यात्रा में 
सुख दुःख एक पहेली है
सुख में हम मुसकाते हैं
दुख में नैना बरसाते हैं
पर यह सच पूरा नहीं
सुख में भी आँख भरती है
दुख में होंठ लरजते हैं
सुख भाता है
दुख रुलाता है
सुख दुःख का धूप छांव सा नाता है
कभी आशा कभी निराशा है
कभी दिन है कभी रात है
दोनों एक दूसरे के पूरक
दोनों ज़िंदगी का मान हैं
जिसने एक नहीं पाया
वो दूसरे की अनुभूति से अज्ञान है
सही ग़लत का आभास कराता
झूला है सुख दुःख जीवन का
आगे पीछे हिलोरें खिलाता
सुख के पीछे मत भागना
आज का सुख भी जायेगा
जीवन के झूले में 
सुख आयेगा --दुःख आयेगा
दोनों में ही संयम रखना
जीवन आनन्दमय हो जायेगा
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©मोनिका कटारिया 'मीनू' (मो० 7837131996)

Tuesday, 6 July 2021

कवियों का दिल अदब की महफ़िल" ऑनलाइन वेबिनार 【01】(खुशियों के पल) अखिल भारतीय कविसम्मेलन व मुशायरे(3 जुलाई 2021)

"कवियों का दिल अदब की महफ़िल" ऑनलाइन वेबिनार 【01】(खुशियों के पल) अखिल भारतीय कविसम्मेलन व मुशायरे 
एम० के० साहित्य अकादमी (रजि०) पंचकूला द्वारा दिनांक 03/07/2021 को शाम 6 बजे "कवियों का दिल अदब की महफ़िल" ऑनलाइन वेबिनार 【01】(खुशियों के पल) अखिल भारतीय कविसम्मेलन व मुशायरे का आयोजन  किया गया। जिसमें विभिन्न राज्यों व प्रान्तों से उपस्थित सभी प्रख्यात कलमकारों को Movement Of Happiness Award 2021 से नवाज़ा गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता श्री गणेश दत्त जी (पंचकूला) द्वारा की गई। डॉ० प्रतिभा 'माही' जी ने कार्यक्रम का संचालन किया। 


डॉ० प्रतिभा 'माही' जी ने प्रेम-श्रृंगार से ओतप्रोत ग़ज़ल सुनाई........
दिया एक जलाया सवेरे-सवेरे
कोई पास आया सवेरे-सवेरे 

सजा सेज कलियाँ लगीं गुदगुदाने
हिया से लगाया सवेरे-सवेरे

बतायें क्या तुमको कयामत क्या आयी
लबों पर सजाया सवेरे-सवेरे

नजर से नजर जब मिलाई थी उसने 
नशा सा पिलाया सवेरे-सवेरे

चुराकर जिया जब वो जाने लगा था
 घटा बनके छाया सवेरे-सवेरे

 मैं मदहोश होकर लगी झूमने जब
आ खुद में समाया सवेरे-सवेरे

न जाने क्यूँ माही चढ़ी ये ख़ुमारी 
कदम डगमगाया सवेरे-सवेरे
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©® डॉ प्रतिभा 'माही'
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समारोह में उपस्थित प्रख्यात कवि व शायर 
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1. डॉ० अर्चना गुप्ता जी (मुरादाबाद) ने अपनी मधुर आवाज़ में यादों की फुलवारी महकाई....

सपनों की मोहक वादी में , महक रही हर क्यारी है।
सजी हुई सुन्दर फूलों से, यादों की फुलवारी है।।

यहाँ मिले जो दोस्त तुम्हें हैं ,उनको कभी नहीं खोना।
भौतिकवादी युग में मुश्किल मिलना सच्ची यारी है।।

दुख से मत घबरा जाना तुम,आयेंगे सुख भी इक दिन।
देर सवेर भले हो जाए,आती सबकी बारी है।।

सोचा करती हैं ये नदियां, सागर से जब मिलती हैं।
अच्छे लोगों के होते भी, दुनिया कितनी खारी है।।

मिट जाएगी सारी इज़्ज़त, पल में पूरे जीवन की।
याद सदा रखना अभिमानी, होना भी बीमारी है।।

जिसमें हमने पत्र पुराने ,बड़े सँजोकर रक्खे थे।
आज तलक भी खूब महकती,दिल की वो अलमारी है।।

लिखती यदि सिंगार ‘अर्चना’, लिखती जन की बातें भी।
उसके शब्दों में भावों की , मार बहुत दोधारी है।।
      ©डॉ० अर्चना गुप्ता मुरादाबाद(उत्तर प्रदेश)
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2. श्री आलोक रंजन इन्दौरवी जी (इन्दौर) ने दर्दे  दिल की कहानी कही.....

दर्दे दिल की एक कहानी लिखना है
आया क्यों आंखों में पानी लिखना है

सुनकर उनके दिल का हाल लगा मुझको
गहरी है ये प्रीत दिवानी लिखना है

इश्क मुहब्बत प्यार इसे ही कहते हैं
आई है फिर एक जवानी लिखना है

अपने दिल का राज छुपाके तुम रक्खो
हमको इसकी एक निशानी लिखना है

आंखों के उजले उजले सपनें को अब
रंगों से भरकर अंजानी, लिखना है

प्रेम दिवानों का किस्सा दुहराकर के
मिलने की रुत एक सुहानी लिखना है

सागर  की  गहराई  में  उतरें  रंजन
पागल दिल की है नादानी लिखना है
             ©आलोक रंजन इंदौरवी【इंदौर】
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3. डॉ० शशि तिवारी जी (आगरा) ने करोना आपदा के इस बेढब समय में निस्वार्थ सामाजिक कार्यकर्ताओं के उत्साहवर्धन के लिए अपना यह गीत सुनाया....
ये कर्मवीर ये धर्मवीर,
इनको हम करें प्रणाम।
इनको हम करें प्रणाम।।

प्रेम और निस्वार्थ भाव से कर्तव्यों का पालन
जो करते हैं उनके माथे सदा लगाओ चन्दन
सेवा को ही धर्म समझते
होकर जो निष्काम।
इनको हम करें प्रणाम।।

औरों की सेवा में जिनका सदा लगा है ध्यान
उनके गर्मजोश का कोई हमें नहीं अनुमान
आओ इनका जोश बढ़ायें
ये हैं सुख के धाम।
इनको हम करें प्रणाम।।

भीषण बीमारी के रोगी की जो सेवा करते
उनकी इच्छाशक्ति बढ़ाते कोरोना से लड़ते
लम्बा युद्ध चलेगा फिर भी शुभ होगा परिणाम।
इनको हम‌करें प्रणाम।।
                   प्रो.(डॉ.)शशि तिवारी
           अन्तर्राष्ट्रीय कवयित्री, साहित्यकार, समाजसेवी
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4. डॉ० एल० बी० तिवारी 'अक्स' जी (प्रतापगढ़) ने ग़ज़ल प्रस्तुत की:.....
एक कोने में  पड़ा है , आइना टूटा हुआ !!
वक्त का मारा हुआ है ,आइना टूटा हुआ !!

देखकर बिखरावअपने दिलका शायद इसलिए
कुछ नहींअब बोलता है,आइना टूटा हुआ !!

कितने टुकड़ों में बंटा है दिल हमारा दोस्तो,
दर हकीकत जानता है , आइना टूटा हुआ !!

दूरियाँ  कितनी  बढ़ी  हैं , जानने  के वास्ते,
दिल हमारा  चाहता है , आइना टूटा हुआ !!

होंठ पर मुस्कान-खुशियाँ, इक मुहब्बत के सिवा,
कब कहाँ कुछ मांगता है,आइना टूटा हुआ !!

लोग  डरते  हैं  तभी  आते  नहीं  हैं सामने ,
राज दिल के खोलता है,आइना टूटा हुआ !!

देर तक सजना-संवरना रूबरू जिसके तेरा ,
क्या हुआ?अब पूंछता हैआइना टूटा हुआ !!

आप ने भी खै़रियत पूछी नहीं उसकी कभी,
दर्द  कितने  झेलता है , आइना टूटा हुआ !!

इक न इक दिन उसको भी कीमत चुकानी थी,मगर
सरहदें क्यूँ लांघता है , आइना टूटा हुआ !!

रूठना मनुहार करना हुश्न पर खुद रीझना,
बस यही तो चाहता है आइना टूटा हुआ !!

क्यों समझ आता नहीं बेरह्म ही  दुनिया है ये,
किसके पीछे भागता है, आइना टूटा हुआ !!

फिर जुड़ेंगे दिल से दिल ये खुशगुमानी छोड़िये,
कब दिलों को जोड़ता है , आइना टूटा हुआ !!

आप तन्हाई में जिससे देर तक बतियाते थे,
घर से  वो लापता  है , आइना टूटा हुआ !!

कल तलक जिसको था अपनी हक़ बयानी पर गुमां,
आज कातर दीखता है , आइना टूटा हुआ !!

अक्स चेहरे को नुमाया आइना करता ,मगर
दिल के अन्दर झांकता है,आइना टूटा हुआ !!
                © डॉ एल बी तिवारी 'अक्स'
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5. डॉ० रोशनी किरण जी (मुम्बई) ने अपनी ग़ज़ल के ज़माने की हकीकत को दर्शाया ... .

मुक्तक _मंजरी में दिए बहर पर एक ग़ज़ल _
               1222 / 1222 / 1222 / 1222

उन्हें कैसे बताएं हम हक़ीक़त देख ली उनकी ।
 रखें ईर्ष्या हमेशा ही मोहब्बत देख ली उनकी ।। १ ।।

 कहें अपना , भरम पाले जमाने भर में फिरते हैं _
 वफ़ा उनकी नहीं दिखती शराफत देख ली उनकी ।। २ ।।
 
वफ़ा के वो ख़ुदा बनते जफाओं के जमाने में _
 मोहब्बत उनकी पल _छिन की अदावत देख ली उनकी ।। ३ ।।

भरोसा अब नहीं उनकी मोहब्बत पर हमें यारा _
 जफ़ा ही बस मिली हम को इनायत देख ली उनकी ।। ४ ।।

" किरण " उनकी कभी बातें समझ ना आ सकी हमको _
कहें कुछ भी , करें कुछ भी रवायत देख ली उनकी ।। ५ ।।

____ रोशनी किरण 
        
              ©डॉ० रोशनी किरण (मुम्बई)
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श्री गणेश दत्त जी ने अध्यक्षता करते हुए अपना गीत सुनाया "मन की होली''
     ©श्री गणेश दत्त (पंचकूला)
 
             डॉ०प्रतिभा 'माही' (फाउंडर/चैयरमेन)
         एम० के० साहित्य अकादमी (रजि०) पंचकूला

Saturday, 20 March 2021

शहीदी दिवस एवं शुभ होली के उपलक्ष्य में काव्य गोष्ठी का आयोजन

शहीदी दिवस एवं शुभ होली के उपलक्ष्य में आयोजित काव्य गोष्ठी

एम० के० साहित्य अकादमी (रजि०) पंचकूला
एवं
जिला शिक्षा व प्रशिक्षण संस्थान (DIET)पंचकूला
के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित
"देशभक्ति के संग होली के रंग"
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दिनांक: 23/03/2021 
दिन: मंगलवार 
समय: 10.30 AM
स्थान: जिला शिक्षा व प्रशिक्षण संस्थान (DIET) सेक्टर - 2, पंचकूला (H.No. 19 के सामने)

मुख्य अतिथि: 
डॉ० चन्द्र त्रिखा जी ( निदेशक ) 
हरियाणा साहित्य अकादमी पंचकूला)
विशेष अतिथि: 
डॉ० प्रातिभा सिंह (सदस्य)
हरियाणा राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग
विशेष अतिथि: 
डॉ० रंजीत सिंह जदोन (उपमंडल अधिकारी)
पशुपालन एवं डेरींग, पंचकूला

( इस समारोह में आपका अपनी रचनाओं के रंगों के साथ अभिनंदन है कृपया समय पर पहुँचकर समारोह की शोभा बढायें)
निवेदिका
डॉ० प्रतिभा 'माही' (अध्यक्ष/संस्थापिका)
एम० के० साहित्य अकादमी (MKSA) पंचकूला
संयोजिका: सुनीता नैन (Principal) Diet Panchkula





पुस्तक लोकार्पण एवं अखिल भारतीय कवि सम्मेलन तथा वरिष्ठ नागरिक काव्यपाठ

( वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप जयंती के उपलक्ष्य में राष्ट्रीय साहित्यिक महोत्सव ) पुस्तक लोकार्पण एवं अखिल भारतीय कवि सम्मेलन  तथा वरिष्ठ नाग...