महिला काव्य मंच द्वारा नव वर्ष के उपलक्ष में आयोजित दिनांक 29/12/2019 को गोष्टी की चन्द झलकियां
Monday, 6 January 2020
Thursday, 26 December 2019
2020 में होने जा रहे 15वें हरियाणा अंतर्राष्ट्रीय फ़िल्म महोत्सव की उदघोषणा
https://youtu.be/iqVb34w8V7E
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Monday, 23 December 2019
ग़ज़लों की मलिका और गीतों की रानी---डॉ प्रतिभा माही
इश्क़ की हूँ मैं देवी कयामत भी हूँ
कुछ मचलते दिलों की इबादत भी हूँ
मैं हूँ रब की गजल और माही तेरी
हर नज़र में छुपी इक शरारत भी हूँ
© डॉ० प्रतिभा 'माही'
बेज़ुबाँ बन्दों की इक बदिन मैं ज़ुबाँ हो जाऊँगी
छीन मत लेना कभी तू ये कलम इस हाथ से
सांस भी रुक जाएगी और मैं फ़ना हो जाऊँगी
© डॉ० प्रतिभा 'माही'
ख़ुद से कितने गिले क्या कहें
क्यूँ हैं लव ये सिले क्या कहें
तेरे दर तक पहुँच तो गये
पाँव कितने छिले क्या कहें
© डॉ० प्रतिभा 'माही'
••••खबरें••••
एम०के० सहित एकेडमी द्वारा आयोजित 15 राष्ट्रीय वार्षिक अधिवेशन 2019 की खबरें निम्न अखबारों में प्रकाशित
जनमार्ग न्यूज़ पेपर
आज समाज न्यूज़ पेपर
हिन्द जनपथ
Tuesday, 17 December 2019
दिल तो बच्चा है.....!
क्या आप सभी को अपना बचपन याद आता है...?
दोस्तों ..! क्या आप सभी को अपना बचपन याद आता है, ज़रूर आता होगा, क्योंकि मुझे भी अपना बचपन बहुत याद आता है । मेरा दिल करता है कि मैं उन्हीं दिनों में वापस लौट जाऊँ , पर ऐसा मुमकिन नहीं है ।
आपका दिल भी करता होगा कि आप भी उन्हीं बचपन के दिनों में वापस लौट जायें , पर ऐसा नहीं हो सकता , हम बस उन दिनों को याद कर सकते हैं । उन्हीं दिन की यादों को सँजोते हुए , मैंने कुछ पंक्तियां कविता व ग़ज़ल के रूप में प्रस्तुत की है .....!
मनचले
*******
आ चल ....!
ले चलूँ तुझे...
बचपन के उस दौर में ...!
जब हम ...
कुछ नटखट...
कुछ भोले और मासूम...
कुछ तेज तर्रार...
तितली और भँवरे से उड़ा करते..!
लड़ते झगड़ते..
रूठ जाते..
एक दूसरे से...
बात बात पर कट्टी करते....
और...
अगले ही पल पुच्चा कर लेते..!
बन्दरों की भाँति...
उछलते कूदते....
एक दूसरे की नकल कर...
आपस मे चिढ़ाते...
नाचते गाते...
गले लगा लेते...
न किसी का भय....
न किसी की फिकर....
हम सब ऐसे ही...
मनचले थे ....
©डॉ० प्रतिभा 'माही'
नटखट दिल...! एक बच्चा ही तो है, जो हर घड़ी हर कदम पर एक मस्त मन मौजी चंचल परिन्दे की भाँति स्वच्छन्द खुले आकाश में नए नए ख़्यालों का पुलंदा लिए अपनी लम्बी- लम्बी उड़ानें भरता रहता है और रच डालता है अपनी ही एक अलग नई दुनियाँ व नया इतिहास तथा नए नए विचारों का गुलदस्ता लिए कूद पड़ता है जीवन रूपी गहरे समुन्दर में, वक्त की पतवार को थामे , लहरों के साथ झूलता , पवन की तरह हिलोरें लेता दिल रूपी सागर के अन्तस से समेट लाता है अनमोल रत्न ... कुछ हीरे कुछ मोती और बिखेर देता है ज़िन्दगी के कोरे ,साफ-सुथरे पाक दामन पर और वो पाक दामन है हमारा भोला सा ,प्यारा सा मासूम बचपन।
ग़ज़ल
तेरा बचपन मेरा बचपन।
किधर गया वो प्यारा बचपन।
कदम जवानी में जब रक्खा
रूठ गया वो यारा बचपन।
पल में तोला पल में माशा।
कैसा अदभुत न्यारा बचपन।
मौज में रहता हर पल अपनी।
खुशियों का फब्बारा बचपन।
नटखट नाज़ुक फूलों सा वो ।
अखियों का है तारा बचपन।
धड़कन है वो तो हर दिल की ।
सबका राज दुलारा बचपन।
अन्तस में छिप बैठा 'माही'।
चंचल चाँद सितारा बचपन।
©✍डॉ० प्रतिभा माही
Monday, 16 December 2019
15वां वार्षिक राष्ट्रीय अधिवेशन 2019 :---एम०के० साहित्य अकादमी द्वारा आयोजित
डॉ० कुँवर बेचैन को राष्ट्रीय एम०के० साहित्य अकादमी शिरोमणि अवार्ड 2019 से नवाज़ा गया
मुख्य अतिथि श्री रमेश कृष्ण (आई०ए०एस०) सी०ई०ओ० हरियाणा राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन, पंचकुला
एम०के० साहित्य अकादमी पंचकुला (रजि०) एवं माइंड वेदा इंडिया के संयुक्त तत्वावधान में हरियाणा उर्दू अकादमी पंचकुला के सहयोग से डॉ मनोज कुमार गुप्ता की स्मृति में 15वें वार्षिक राष्ट्रीय अधिवेशन 2019 के अंतर्गत कवि सम्मेलन एवं मुशायरा तथा अवार्ड व सम्मान समारोह का आयोजन दिनांक 14 दिसंबर 2019 ( दिन शनिवार ) को दोपहर 2.30 से लगभग 7 बजे हरिराणा अकादमी भवन सेक्टर 14, पंचकूला के सभागार में मुख्य अतिथि श्री रमेश कृष्ण (आई०ए०एस०) सी०ई०ओ० हरियाणा राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन, पंचकुला विशेष अतिथि डॉ० नसीब सिंह मन्हास निदेशक, चंडीगढ़ दूरदर्शन डॉ० चंद्र त्रिखा (निदेशक , हरियाणा उर्दू अकादमी पंचकुला ) श्री वीरेन्द्र सिंह चौहान ( निर्देशक , हरियाणा ग्रंथ अकादमी पंचकुला), डॉ० रणबीर सिंह, ज्वाइनट डायरेक्टर ,बागबानी विभाग, हरियाणा, श्रीमती सुनीता नैन डी०पी०सी० (समग्र शिक्षा) शिक्षा विभाग हरियाणा पंचकुला के सानिध्य में भव्य कवि सम्मेलन व मुशायरे का आयोजन भी किया गया ।
विभिन्न प्रान्तों से पधारे हास्य, ओज, श्रृंगार ,प्रेम इत्यादि सभी रसों से ओत-प्रोत, आमंत्रित अंतर्राष्ट्रीय एवं राष्ट्रीय प्रख्यात कलमकार श्री कुँवर बेचैन (गाजियाबाद, उत्तर प्रदेश ) श्री कैलाश सोनी सार्थक (उज्जैन, मध्यप्रदेश ) डॉ० रंजन विशद (बरेली, उत्तर प्रदेश) सुश्री तूलिका सेठ (गाजियाबाद, उत्तर प्रदेश तथा सुश्री पूनम माटिया (दिल्ली ) ने अपने हुनर से समारोह में चार चांद लगा दिए।
डॉ० प्रतिभा माही 2005 से प्रतिवर्ष अपने पति डॉ मनोज कुमार गुप्ता की स्मृति में यह समारोह करवाती आ रही हैं और अब तक लगभग 250 विभूतियों को अवार्ड व सम्मान प्रदान कर चुकी है और आगे भविष्य में भी करती रहेंगी। देखिए डॉ प्रतिभा माही ने अपनी 4 पंक्तियों में क्या कहा है देखिए---
"आज हूं तन्हा मगर कल कारवां हो जाऊंगी
बेजुवां बन्दों की इक दिन मैं जुवां हो जाऊंगी
छीन मत लेना कभी तू यह कलम इस हाथ से
सांस भी रुक जाएगी और मैं फना हो जाऊंगी "
डॉ० कुँवर बेचैन अंतरराष्ट्रीय कवि ब शायर हैं उनकी शायरी ने वहां उपस्थित सभी श्रोताओं को भाव विभोर कर आनन्द से झूमने को मजबूर कर दिया उनकी शायरी की एक झलक देखिए ----
छू के होंठों को मिरे मुझ से बहुत दूर गई
वो ग़ज़ल मैं ने बड़े शौक़ से गाया था जिसे
राष्ट्रीय एम०के० साहित्य अकादमी रत्न अवार्ड 2019---डॉ० रंजन विशद जी
दूसरी तरफ डॉ. रंजन विशद जी ने अपने ग़ज़ल व गीतों से सभी श्रोताओं का मन मोह लिया । बानगी देखिए---
"मन में बसा लूँ ऐसा मेहमान ढूंढता हूँ
कुछ हटके मन्दिरों से भगवान ढूंढता हूँ
इन्सानियत की बस्ती से उठ रह धुंआ है
मैं उस धुएँ में अपनी पहचान ढूंढता हूँ"
राष्ट्रीय एम०के० साहित्य अकादमी रत्न अवार्ड 2019---श्री कैलाश सोनी 'सार्थक' जी
श्री कैलाश सोनी सार्थक हास्य व्यंग के कवि हैं पैरोडी गीतकार भी हैं जिन्होंने अपने हंसी के रसगुल्ले भवन के तीरों से श्रोताओं में एक नई उमंग भर दी । देखिए वह अपनी 4 पंक्तियों में क्या कहते हैं---
"झूठी बातों से मन अपना बहलाया है
जीवन अपना ऐसे सदा चलाया है
महबूबा भी जाने शब्दों की महिमा
चांद सितारे कौन जमीन पर लाया है"
श्रीमती तूलिका सेठ ने शेर शायरी से सभी को एक नई दिशा देकर अपनी मधुर आवाज़ से भाव विभोर कर दिया। देखिए वह क्या कहती हैं----
दिए बनकर जो तूफानों में जलना सीख जाते हैं
वो हर हालत में मुश्किल से निकलना सीख जाते हैं
जहाँ बचपन में छिन जाता है साया माँ के आँचल
वो बच्चे धूप की गर्मी में पलना सीख जाते हैं
राष्ट्रीय एम०के० साहित्य अकादमी गौरव अवार्ड 2019---पूनम माटिया जी
पूनम माटिया भी कुछ कम नहीं रही उन्होंने भी अपनी मधुर आवाज से लोगों की दिलों में अपनी जगह बनाई और समारोह में चार चांद लगा दिए ,आइए उनका शेर देखिए---
"फिर से ख़ुद को आज़माएँ किसलिए
फिर से दिल पे ज़ख़्म खाएँ किसलिए
हमने सच कहने को थामा है क़लम
अपने फ़न को बेच खाएँ किसलिए"
श्रीमती सुनीता नैन डी०पी०सी० (समग्र शिक्षा) शिक्षा विभाग हरियाणा पंचकुला
इस समारोह में आमंत्रित अभी प्रबुद्ध अतिथि गणों को तथा राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय कलमकारों को अवार्ड व सम्मान से नवाज़ा।
समारोह की अध्यक्षता श्री कुँवर बेचैन द्वारा की गयी। समारोह सम्पूर्ण दृष्टि से सफल रहा । इसका पूरा श्रेय डॉ प्रतिभा माही ,श्री कंवल बिंदुसार व उनकी पूरी टीम को जाता है
From:-
डॉ० प्रतिभा "माही"
(फाउंडर /अध्यक्षा )
एम०के० साहित्य अकादमी पंचकुला
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