कलमकारों की ताजपोशी व विराट कवि सम्मेलन
एम० के साहित्य अकादमी पंचकूला की महा सचिव ने बताया कि दिनांक 27/11/2022 को सात राज्यों से चुने गये कलमकारों की ताजपोशी व विराट कवि सम्मेलन का यह उत्सव अम्बाला कैंट ब्रह्माकुमारी सेंटर पर एम० के साहित्य अकादमी पंचकूला द्वारा हरियाणा साहित्य अकादमी पंचकूला के सौजन्य से आयोजित किया गया। यह 18वां राष्ट्रीय अधिवेशन है जो डॉ० प्रतिभा 'माही' प्रति वर्ष नवम्बर में अपने पतिदेव डॉ० मनोज कुमार गुप्ता की स्मृति में आयोजित करती हैं।
डॉ० प्रतिभा 'माही' ने बताया कि उनका 24 वर्षों का समय कैसे बीत गया.. देखें क्या कहती हैं...
"24 वर्षों का ये सफर कैसे कट गया... ?
पता ही नहीं चला....!
'मनु' तुम्हारी हर आरज़ू पूरी हुई....
तुम्हारे दिल के टुकड़े...
आँखों के तारे...
अब बड़े हो गए हैं...!
देखो दोनों हीं....
अपने पैरों पर खड़े हो गए हैं... !"
डॉ० प्रतिभा 'माही'
इसे सुनकर सभी भावुक हो गये। लायन दिनेश सूद द्वारा एक शाही अन्दाज़ में सभी कलमकारों व अतिथियों का अभिनन्दन किया गया तथा दो नन्हीं बालिकाओं ने अपने नृत्य के माध्यम से सभी का स्वागत किया। लायन दिनेश सूद ने मंच सँभालते हुए सभी कवियों से रूबरू कर, माँ शारदे के समक्ष दीप प्रज्वलित करवाये, जिससे सम्पूर्ण प्रांगड़ प्रकाशमय हो गया।
दीक्षा गुप्ता ने सरस्वती वंदना कर भव्य कविसम्मेलन का आगाज़ किया।
सर्वप्रथम मनोज ख़ुशनुमा ने अपनी बात कुछ यूँ रखी, बोले.....
"कुछ ऐसा निराला अंदाज़-ए-बयां मेरा हो जाए।
तेरे ग़म मेरे और मेरी खुशियों पे हक़ तेरा हो जाए ।
“खुशनुमा” इक दिया हूँ मै प्यार की रौशनी का ।
काश मेरे दम से जग में प्यार का सवेरा हो जाए''।
मनोज ख़ुशनुमा
ततपश्चात नारी सशक्तिकरण का रूप धारण कर, अपनी हुंकार भरने मंच पर उतरी डॉ० कान्ता वर्मा, नारी की पीड़ा लेकर अपना सवाल संविधान के करते हुए....
मैं व्याकरण नहीं आचरण लिखती हूँ.....
अलंकार नहीं आधार पढ़ती हूँ....
शब्द नहीं संस्कार गढ़ती हूँ.....
श्रृंगार नहीं सहार करती हूँ
पीड़ा के गर्व को चीर कर निकली हूँ इसलिए ....
मंच से हुंकार भरती हूँ।
उसके बाद भोपाल से पधारे डॉ० मुकेश कबीर ने भारत की महिमा का बखान करते हुए अपनी बात कुछ यूँ कही ...कि समस्त तोग मस्ती में तालियाँ बजा कर झूमने लगी। उनकी बानगी देखिए....
" भारत के रहने वाले हैं, भारत की महिमा गाएंगे।
आA चाहे जितने कष्ट मिले, हर जन्म यहीं पर चाहेंगे।
खुद मिट कर भी करते रहेंगे, इसको हम आबाद ।
हिंदुस्तान जिंदाबाद, हिंदुस्तान जिंदाबाद।"
डॉ० मुकेश कबीर
चौथे नम्बर पर, अपने शब्दों व वाणी का जलवा दिखाने माइक पर पहुँची नीलम त्रिखा , अपना केसरिया रंग बिखेरते हुए बेटियों के हौसले व बुलंदियों की बात कही। क्या कहा देखें....
"मुझे रंग दे रे रंगरेज मेरे..मुझे रंग दे रे रंगरेज मेरे।
पहला रंग केसरी कर दे रंग है जो बलिदानों का।
दूसरा रंग सफेद तू कर दे जो शांति का पैगाम दे।
तीसरा रंग हरा तू कर दे जब शहीदों को सलाम दे।"
फिर नम्बर आया चंडीगढ़ से पधारे योग गुरु डॉ० अनीश गर्ग का, जो शब्दों से खेलते हुए , माँ क़दमों जन्नत का राज़ बताते हैं तथा उनके में गिरने को कहते हैं तथा साथ ही अपने देश के प्रति अपना प्रेम प्रकट करते हुए कहते हैं कि......
" मैं बेशुमार अपना वतन चाहता हूँ।
मैं तिरंगे में अपना कफन चाहता हूँ ।
बेटियाँ महफ़ूज़ रहें हर जगह पे।
मैं ऐसा फूलों का चमन चाहता हूँ।"
फिर मंच पर वो उतरे, जो संस्कारों को सर्वोपरि रख, मात-पिता की सेवा कर , बुजुर्गों की दुआएँ बटोरने में विश्वास रखते हैं , बेटियों को सिर का ताज कहने वाले सागर सूद ने बेटी की विदाई का गीत सुनकर सबको भावुक कर दिया और गीत से पहले क्या कहा ? गौर करें....!
" मेरी धड़कन है मेरी जान है मेरी बेटी,
सर की पगड़ी है मेरी शान है मेरी बेटी,
जिसके दम से है मेरे घर में उजाला 'सागर',
सच कहूँ तो मेरी पहचान है मेरी बेटी।"
फिर इस माहौल को एक नया मोड़ देने के लिए गुरुग्राम से पधारे हरियाणा गौरव सुनील शर्मा ने माइक को हाथों में एक-दो हँसगुल्ले छोड़े तो सभी श्रोताओं में फिर से एक खुशी की लहर दौड़ गयी। तब अपना ओज रस बिखेरते हुए क्या कहा गौर फ़रमायें....
" नहीं डरते जो तूफ़ाँ से अगन मुट्ठी में रखते हैं,
लुटायें जान गैरों पर वही हर दिल में बसते हैं,
करमवीरों का कायरता से रिश्ता हो नहीं सकता ,
उड़ा दें फूक से पर्वत वही इतिहास रचते हैं।"
हरियाणा गौरव सुनील शर्मा
अब नम्बर था ग्वालियर से आये हास्य व श्रृंगार के कवि रविन्द्र रवि का, रवि ने अपनी मस्त बातों से सभी श्रोताओं को हँसा-हँसा कर लौट-पोट कर दिया और पूरे वातावरण को खुशी के हँसगुल्लों से भर दिया और अंत में सेवा भाव को दर्शाते हुएअपने दिल की बात रखी....
"मेरे घर में बुज़ुर्गों की अभी पदचाप ज़िंदा हैं,
कभी मानस कभी गीता के पावन जाप ज़िंदा हैं,
मैं जब घर से निकलता हूँ दुआएँ साथ चलती हैं,
मुझे कुछ हो नहीं सकता मेरे मां-बाप ज़िंदा हैं।"
उसके बाद डॉ० प्रतिभा माही जो कि इस समारोह की आयोजन कर्ता हैं तथा प्रेम-श्रृंगार-सूफ़ी रस की प्रख्यात जानी-मानी शायरा हैं, उन्होंने प्रेम व समर्पण की बात कही तथा अपने सूफी व प्रेम रंग को बिखेरते हुए कहा....
"जिसका नहीं है कोई उसका तो बस खुदा है ,
संसार बस यह सारा विश्वास पर टिका है,
तुम लाख चोरी कर लो लाखों गिरा लो पर्दे ,
क्या आईने से कोई चेहरा कभी छुपा है।।
डॉ० प्रतिभा 'माही'
औऱ...! अंत में उनका नम्बर आया जो पूरे विश्व में अपनी पहचान बना चुकी हैं , जो हास्य व प्रेम-श्रृंगार की कवयित्री व मधुर आवाज की कोकिला के रूप में जानी जाती हैं, वो हैं डॉ० कीर्ति काले। उन्होंने अपनी सुरीली आवाज से
सभी का मन मोह लिया और सभी श्रोता तालियों की ताल देकर झूमने लगे।देखिए उनकी बानगी....
याद कोई करता है हिचकियाँ बताती हैं ,
कौन पास कितना है दूरियाँ बताती हैं ।
धीरे-धीरे खुलते हैं यह दिलों के दरवाजे ,
दिल की बात आंखों की खिड़कियाँ बताती हैं ।
इस उत्सव में विभिन्न राज्यों से आमंत्रित प्रख्यात कलमकार डॉ० कीर्ति काले (दिल्ली) को राष्ट्रीय साहित्य साम्राज्ञी अवार्ड , श्री रविन्द्र रवि (ग्वालियर, मध्यप्रदेश) को राष्ट्रीय साहित्य शिरोमणि अवार्ड, श्री सुनील शर्मा (गुरुग्राम, हरियाणा) को राष्ट्रीय साहित्य रत्न अवार्ड, श्री सागर सूद (पटियाला, पंजाब) को राष्ट्रीय साहित्य भूषण अवार्ड, डॉ० अनीश गर्ग (चंडीगढ़) व श्रीमती नीलम त्रिखा (पंचकूला, हरियाणा) को राष्ट्रीय साहित्य गौरव अवार्ड, डॉ० मुकेश 'कबीर' (भोपाल, मध्यप्रदेश) , डॉ० कान्ता वर्मा (करनाल, हरियाणा) तथा श्री मनोज ख़ुशनुमा ( माउन्टआबू, राजस्थान) को राष्ट्रीय साहित्य यशस्वी सम्मान से क्रमशः सुनिश्चित की गई मानदेय राशि (11000/- 5100/- 3100/- 2100/- 1100/-) तथा शाल, श्रीफल, मोतियों की माला, शाही पटका, शाही उपहार व शाही प्रशस्ति पत्र से मुख्य अतिथि: माननीय नागेंद्र शर्मा जी ( अतिरिक्त निर्देशक, हरियाणा कला परिषद, चंडीगढ़) तथा विशिष्ट अतिथि: श्री वी०के० जैन (अग्रणी अधिवक्ता एवं दिगम्बर जैन सभा अंबाला के अध्यक्ष) व विशेष अतिथि: ब्रह्माकुमारी प्रेम दीदी (करनाल नेशनल, को-ऑडिटर आर्ट & कल्चर विंग) के कर कमलों द्वारा अलंकृत किया गया तथा सभी अतिथियों को डॉ० प्रतिभा 'माही' द्वारा नवाज़ा गया।
यह समारोह पूरी तरह से सफल रहा इसने ऊंचाइयों को छूते हुए सभी श्रोताओं के दिल में अपनी एक छाप छोड़ दी सभी ने इस समारोह की बहुत सराहना की जिसकी सफलता का पूरा श्रेय डॉ प्रतिभा माही, दीक्षा गुप्ता तथा ब्रह्माकुमारीज की पूरी टीम को जाता है।
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