Tuesday, 23 April 2024

नव संवत्सर 2081 के उपलक्ष्य में भव्य कवि सम्मेलन 21/4/2024



एम० के० साहित्य अकादमी ने उठाया बीड़ा.. करेगी हर प्रांत में कवि सम्मेलन 

              एम० के० साहित्य अकादमी पंचकूला की अध्यक्ष डॉ. प्रतिभा 'माही' ने कई वर्षों से बीड़ा उठाया हुआ है कि  वो ट्राइसिटी से बाहर अलग अलग प्रांतों व शहरों में कवि सम्मेलन आयोजित करेंगी। पिछले दो वर्षों में एम० के० साहित्य अकादमी पंचकूला द्वारा दिल्ली, अंबाला, नीलोखेड़ी, करनाल व पंचकूला में लगभग 10-12 राष्ट्रीय कवि सम्मेलन आयोजित कर चुकी हैं। 

               अभी हाल ही में नव संवत्सर 2081 के उपलक्ष्य में एक और "भव्य कवि सम्मेलन" का आयोजन ब्रह्माकुमारी प्रेम दीदी के सहयोग से 21 फरवरी 2024 को   ब्रह्माकुमारी , सेक्टर - 7 , करनाल (हरियाणा) के प्रांगण में आयोजित किया गया।

               इस समारोह मै देश के अलग- अलग प्रान्तों से प्रख्यात साहित्यकार व कवि उपस्थित हुए। ब्रह्माकुमारी बहनों ने सभी का स्वागत व सम्मान किया।  श्री दिनेश शर्मा दिनेश  ने  मंच को संभालते हुए दीप प्रज्ज्वलित करवाया ,  एक नृत्य के माध्यम से वन्दना करवा कार्यक्रम को  आगे बढ़ाया। ब्रह्मकुमार मनोज खुशनुमा ने शिव बाबा के गीतों से कवि सम्मेलन का आगाज हुआ और कवि सम्मेलन धीरे-धीरे अपनी उड़ान भरने लगा।

               कवि राधाकान्त पाण्डेय ने अपने छंदों से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर लिया और  शौर्य व शक्ति की बात कही। देखिए पंक्तियां....
आज समय है शौर्य,शक्ति औ साहस के अभिनन्दन का ।
स्वर फूटेगा युद्धभूमि में फिर दुश्मन के क्रंदन का ।।
बासंती मौसम में जब तुम डूबे मस्त बहारों में।
हमने गीत लिखा है तब भी भारत माँ के वंदन का।।

           फिर मंच पर उतरे हास्य व्यंग के जाने माने कवि विनीत पांडेय (दिल्ली) जो कई वर्षों से लपेटे में नेताजी टीवी कार्यक्रम का हिस्सा बन हुए हैं। अपने छोटे छोटे हंसगुल्ले परोस कर श्रोताओं को लोट पोट कर दिया और फिर कविता में क्या कहा..? एक झलक देखे...!
फूल बन कर महक जाना जिंदगी है ।
गीत सुख के गुनगुनाना जिंदगी है।।
गम के बादल आएंगे और जाएंगे।
गम भुला कर मुस्कुराना जिंदगी है।।
      

            फिर बारी आई संचालन कर रहे कवि दिनेश शर्मा की, जो प्रख्यात कवि भी हैं और एक अच्छे लेखक भी हैं। जिन्होंने समाज की परिस्थितियों को बदलने के लिए ईश्वर से गुहार लगाते हुए कहा... क्या कहा देखिए....
" धर्म स्थापित करने को अब,कदम बढ़ाना होगा। 
हे गिरधारी कलियुग में फिर , तुमको आना होगा।।"


।       विख्यात गीतकार और गज़लकार चरणजीत चरण ने अपने संस्कार आधारित छंदों से श्रोताओं  मां मन  मोह लिया। मां की महिमा का बखान करते हुए कहा , बानगी देखिए...
देश के दुलारे जिस रास्ते से गुज़रे हों ,
ऐसी पगडंडी ऐसा ठाव छू के चलिए।
फल-फूलते हों जहाँ प्रेम और संस्कार ,
सपनों का ऐसा कोई गाँव छू के चलिए ।
ज़िंदगी जिन्होंने लिख दी है पथिकों के नाम ,
राह के दरख़्तों की छाँव छू के चलिए ।
पूण्य चारों धाम का बनेगा हर एक काम ,
घर से चलो तो माँ के पाँव छू के चलिए ।।


       सभी कवियों ने अपनी  प्रस्तुति  पर श्रोताओं से खूबसारी तालियां बटोरीं।


            यह समारोह माननीय मुख्य अतिथि: डॉ० आशिमा गक्खड़ (प्राचार्या दयाल कॉलेज करनाल)  के सानिध्य में किया गया। उन्होंने कार्यक्रम की सराहना करते हुए कहा कि  वो इस तरह के कवि सम्मेलन का बार बार आनंद लेना चाहेंगी।

      अंत में डॉ. प्रतिभा 'माही' (वरिष्ठ साहित्यकार व मंचीय कवयित्री) ने इस कवि सम्मेलन की  अध्यक्षता करते हुए अपने वक्तव्य में बताया कि   इस काव्य उत्सव का उद्देश्य वैश्विक संस्कृति, प्रेम, शान्ति सद्भाव को समर्पित हो नव संवत्सर के महत्व को समझाना है तथा हिन्द वासियों को हिन्दू नव वर्ष मानने को प्रोत्साहित करना है। डॉ. प्रतिभा 'माही' ने यह भी बताया कि कला व संस्कृति के माध्यम से अच्छे संस्कारों को समाज में जीवित रखा जा सकता है, समाज को एक नई दिशा प्रदान की जा सकती है और समाज में परिवर्तन भी लाया जा सकता है। माही ने अपने और शिव बाबा के बारे में कुछ कही, कुछ अनकही बाते कही, देखिए उनकी बानगी...
"मेरा उसका, क्या रिश्ता है..?
वो जाने या मैं जानूँ  ..!
ना जाने ये दुनिया सारी... 
ना जान ये लोग...!
रूह ने उसको, जान लिया है ...
लगा इश्क का रोग...!!
मेरा उसका, क्या रिश्ता है..?
मैं जानूँ या वो जाने...!!
      इस तरह कार्यक्रम अपनी चरम सीमा पर पहुंच गया। सभी श्रोता मंत्रमुग्ध हो गए। तालियों से पूरा प्रांगण गूंजने लगा। सभी कवियों ने कार्यक्रम को सातवें आसमान पर पहुंचा दिया। कार्यक्रम संपूर्ण दृष्टि से सफल रहा। जिसका श्रेय डॉ. प्रतिभा 'माही की हिम्मत को और ब्रह्माकुमारी  प्रेम दीदी की टीम को जाता है।

                      दीक्षा गुप्ता (सचिव )
         एम० के० साहित्य अकादमी, पंचकूला


Wednesday, 11 October 2023

आर्ट दोस्तो


कितने लडके लड़कियां स्मार्ट दोस्तो
सीखली है लूटने की आर्ट दोस्तो
लंबी लंबी फैंकते वो स्वार्थ में सने
बन गये हैं अब खिलौने हार्ट दोस्तो

हो गया है वक्त क्या स्टार्ट दोस्तो
मांगती वो कार बंगला कार्ड दोस्तो
मतलबी रिश्ते सभी, सौदा है प्यार का
बन गया रिश्ता लिविंग का पार्ट दोस्तो

आज के इस दौर में कुछ  नगीने अब भी है
प्यार में डूबे हुए सच्चे सफीने अब भी है

Wednesday, 9 August 2023

राष्ट्रीय हास्य कवि सम्मेलन 29 जुलाई 2023

लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक एवं चन्द्रशेखर "आज़ाद" की जयंती के उपलक्ष में..राष्ट्रीय हास्य कवि सम्मेलन 
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              लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक एवं चन्द्रशेखर आज़ाद की जयंती के उपलक्ष में संस्कार भारती, पंचकूला इकाई के सहयोग से "एम० के० साहित्य अकादमी (रजि०) पंचकूला" द्वारा भव्य "राष्ट्रीय हास्य कवि सम्मेलन" का आयोजन दिनांक - 29/07/2023 को  प्रातः  10:30  बजे, भारत विकास परिषद भवन, सैक्टर: 12 ए, पंचकूला के प्रांगण में आयोजित किया गया। 
           श्री नवीन शर्मा, उत्तर संस्कार भारती के प्रभारी की अध्यक्षता  तथा माननीय मुख्य अतिथि - अंतरराष्ट्रीय हास्य कवि राजेश चेतन के सानिध्य में डॉ० तूलिका सेठ, डॉ० कांता वर्मा, डॉ० अनीश गर्ग तथा युवा कवि गौतम शर्मा  ने अपनी प्रस्तुति देकर कार्यक्रम में चार चांद लगा दिए। डॉ० प्रतिभा "माही" ने सभी अतिथियों का स्वागत कर दीप प्रज्ज्वलित करवाया तथा सरस्वती वंदना के साथ कार्यक्रम का आगाज किया।
             युवा कवि गौतम शर्मा  ने सर्वप्रथम अपनी प्रस्तुति देते हुए क्या कहा देखिए..!
    "जो रुक गया, रुकने दिया, जो चल दिया, चलने दिया।
     जो भी हुआ होने दिया, जो टल गया, टलने दिया।।"
            तो दूसरी तरफ डॉ० अनीश गर्ग ने इंकलाब की बात करते हुए अपनी बात रखी और कहा -
     "मैं बेशुमार अपना वतन चाहता हूं ।
       तिरंगे में लिपटा कफन चाहता हूं।।"
            तत्पश्चात डॉ० कांता वर्मा ने अपनी हुंकार से पूरे प्रांगण को हिला दिया और सभी श्रोताओं में जोश का संचार किया वह कहती हैं-
      " मैं वो कवयित्री हूं जो दिल में आग,
         जुबां पर अंगार रखती हूं ।
         शब्दों से भगत सिंह पैदा करती, 
         कलम से इंकलाब लिखती हूं।।"
         और गाजियाबाद से पधारी डॉ० तूलिका सेठ ने अपनी पेशकश में कुछ यूं कहा-
       "बोलो, इतना प्यार लुटाना, किससे सीखे हो।
        बात बात पर, बात बनाना, किससे सीखे हो ।।
        छेड़छाड़ करने पर तो, सब ही चिल्लाते हैं।
        बिना बात के, शोर मचाना, किससे सीखे हो ।।
           डॉ० प्रतिभा "माही" ने हिंदू राष्ट्र के एक होने की बात कही और समाज में वक्त बदलने का संदेश दिया -
"करे राज हिंदुत्व हमारा, 
वक्त बदलना चाहिए।
अगर लाल भारत माँ के हो, 
रक्त उबलना चाहिए।।
विजय विश्व की शपत उठाओ, 
नाज़ करे भारत भूमि।
चले विश्व पर सत्ता अपनी,
तख्त पलटना चाहिए।।"
           और अंत में हास्य कवि राजेश चेतन जी ने सभी को हंसा हंसा कर लोट पोट कर दिया ।  श्रोताओं की तालियों से पूरा हॉल गूंजने लगा। चेतन जी ने अपनी प्रिय कविता "वनवासी राम" से काव्य पाठ को विराम दिया। देखिए उनकी बानगी -
"मात-पिता की आज्ञा का तो, 
केवल एक बहाना था।
मातृभूमि की रक्षा करने, 
प्रभु को वन में जाना था।।"
          कार्यक्रम के अंत में डॉ प्रतिभा "माही" सभी कवियों अतिथियों को उपहार देकर सम्मानित किया । यह समारोह संपूर्ण रूप से सफल रहा, जिसका श्रेय डॉ० प्रतिभा "माही" की मेहनत व संस्कार भारती पंचकूला इकाई के अध्यक्ष सुरेश गोयल मंत्री सतीश अवस्थी तथा संपूर्ण टीम के सहयोग को जाता है।

डॉ० प्रतिभा 'माही'
(संस्थापिका/ अध्यक्ष)
एम० के० साहित्य अकादमी (रजि०) पंचकूला

Monday, 26 June 2023

अखिल भारतीय कवि सम्मेलन 26/05/2023

दिल्लीी में एम०के० साहित्य अकादमी (रजि०) पंचकूला ने करवाया: 
अखिल भारतीय कवि सम्मेलन

            डॉ० प्रतिभा माही ने अब अलग-अलग राज्यों के अलग-अलग शहरों में कवि सम्मेलन करने का बीड़ा उठाया है। दिल्ली, गुरुग्राम, करनाल, नेलोखेड़ी, अम्बाला, पंचकूला, चंडीगढ़ में अनेकानेक कार्यक्रम करने के बाद पुन: दिल्ली की तरफ रुख किया और एम०के० साहित्य अकादमी (रजि०) पंचकूला द्वारा अखिल भारतीय दयानंद सेवाश्रम के वैचारिक क्रांति शिविर में भव्य अखिल भारतीय कवि सम्मेलन का आयोजन 26 मई 2023 को शाम 4:30 बजे से 7:00 बजे तक आर्य समाज के किशोर शिविर दिल्ली में किया गया।जोकि श्री योगेन्द्र खट्टर के संयोजन में श्री राजेश चेतन के मार्गदर्शन में हुआ।

           इस समारोह में आमंत्रित प्रख्यात अंतरराष्ट्रीय कवि राजेश चेतन, श्री कलाम भारती, श्री रसिक गुप्ता, श्री राजेश अग्रवाल, श्री मोहित शौर्य व डॉ० प्रतिभा 'माही' ने अपनी प्रस्तुतियां दीं। इस समारोह में क्लास 6 से 12वीं तक के समस्त भारत से लगभग 400 बच्चे उपस्थित रहे तथा कवि सम्मेलन का भरपूर आनंद लिया। सभी कलमकारों को उपहार से नवाजा गया। यह प्रोग्राम देश व देश की नई पीढ़ी को समर्पित है।

         सभी कवियों ने वहां उपस्थित सभी श्रोता बच्चे व बड़ों को हंसाया तथा अपनी संस्कार व संस्कृति से ओतप्रोत प्रेरणादायक कविताओं से सभी आनंदित कर दिया। राजेश अग्रवाल ने मंच का कार्यभार संभाला। सभी कवियों की अलग अलग बानगी देखें...!

           डॉ रसिक गुप्ता ने अपनी कविता में भारत भू के सम्मान की बात कही तथा कुछ चटपटे हास्य के रंग बिखेरे...!
"शब्द-शब्द मेरी कविता का, उनका ही सम्मान करें...!
और स्वयं जन-गण-मन जिनके, कर्मों का गुणगान करें...!
शीश झुकाऊं चरण पखारुँ, पहले हर उस माता के....!
अपने वीर सपूतों को जो ,सीमा पर बलिदान करें....!"

         तो  दूसरी तरफ डॉ० कलाम भारती ने देश भक्ति की बात कही...!
          "शहीदाने हिन्द जैसे वफादार नहीं हैं।
          मुल्क पे जॉ देदें वो किरदार नहीं हैं।
          निज मादरे वतन से जिनको प्यार नहीं है,
          उनसे बड़ा इस मुल्क में गद्दार नहीं हैं।।"
          
          डॉ० प्रतिभा 'माही' ने सरस्वती वंदना से आगाज़ कर वैदिक धर्म पीआर प्रकाश डालते हुए कहा...!
      "आर्य समाज वैदिक धर्म, समझो अद्भुत ज्ञान।
       तर्क तुला पर तौलकर करे धर्म व्याख्यान।।"

          और देशभक्ति पर आधारित कुछ कविताएं कही तथा मां के प्रति एक बेटे के भाव क्या होते हैं अपने एक गीत के माध्यम से बताया: बानगी देखें...

"जो रुलाती भी है, जो हंसाती भी है
प्यार की थपकियां दे सुलाती भी है
कौन है...?कौन है...?कौन है...?कौन है...?
वो तो मां है मेरी..!"


            राजेश चेतन ने अपनी वाणी से मंच को गरिमामय बनाते हुए हंसगुल्लों के फव्वारे छोड़े, जिन्हें सुन सभी बच्चे लोटपोट हो गए। बीच-बीच में संस्कारों की बात भी बच्चों को बताई और अन्त में आर्य समाज वैदिक धर्म की बात कहते हुए अपनी रचना पढ़ी, बानगी देखें.....!
             सच में भारत के रखवाले स्वामी जी...
            वेदों को गुंजाने वाले स्वामी जी...!
             नारी का सम्मान जगाया भारत में ....
             मातृशक्ति के बने शिवाले स्वामी जी...!
           
 
समारोह के अंत में सभी कलमकारों को उपहार देकर नवाजा। समारोह सम्पूर्ण दृष्टि से सफल रहा।
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डॉ० प्रतिभा 'माही'
(फाउंडर/अध्यक्ष)
एम०के० साहित्य अकादमी पंचकूला 
मो०8800117246


पुस्तक लोकार्पण एवं अखिल भारतीय कवि सम्मेलन तथा वरिष्ठ नागरिक काव्यपाठ

( वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप जयंती के उपलक्ष्य में राष्ट्रीय साहित्यिक महोत्सव ) पुस्तक लोकार्पण एवं अखिल भारतीय कवि सम्मेलन  तथा वरिष्ठ नाग...